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Madhya Pradesh Waqf Board: वक्फ बोर्ड ने शिक्षा के क्षेत्र में शानदार पहल की है. बोर्ड इस बार भी गरीब छात्र-छात्राओं की फीस भरेगा, जिनके ड्रॉपआउट होने की नौबत आ चुकी है.
प्रतीकात्मक.Bhopal News: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय पहल की है. बोर्ड ने आर्थिक रूप से कमजोर और यतीम छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा को सहारा देने के लिए इस वर्ष करीब एक करोड़ रुपये की फीस सीधे शैक्षणिक संस्थानों में जमा करने का निर्णय लिया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन छात्र-छात्राओं को ड्रॉपआउट होने से बचाना है, जो पैसे की तंगी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं.
बोर्ड की इस पहल से सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो न केवल उनकी व्यक्तिगत उन्नति में मदद करेगी, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देगी. बता दें कि पिछले वर्ष भी वक्फ बोर्ड ने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च कर 1102 बच्चों की फीस जमा की थी, जिससे वे अपनी शिक्षा जारी रख सके. बोर्ड के अध्यक्ष सरवर पटेल ने बताया, “हमारा प्रयास है कि कोई भी बच्चा केवल पैसे की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि फीस की राशि सीधे कॉलेज या यूनिवर्सिटी के खाते में जाए, ताकि पूरा लाभ छात्रों को मिले.”
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने अपनी योजना ‘पढ़ो पढ़ाओ राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो’ के तहत इस बार फिर शुरुआत की है. शुरुआत विदिशा जिले के सिरोंज जामा मस्जिद से हो रही है, जहां सिरोंज के बच्चों की फीस जमा करने का काम किया जाएगा. इसके बाद इंदौर की बारी आएगी, जहां अकेले 50 लाख रुपये की फीस स्थानीय बच्चों के लिए जमा की जाएगी. बोर्ड की यह योजना मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य वर्गों के जरूरतमंद बच्चों को भी कवर करती है, जो समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
दूसरे प्रदेशों के लिए मिसाल
इस पहल से न केवल शिक्षा का प्रसार होगा, बल्कि गरीबी और अनाथता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों में नई उम्मीद जगेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं लंबे समय में समाज की असमानताओं को कम करने में सहायक सिद्ध होंगी. वक्फ बोर्ड की यह मुहिम अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है, जहां शिक्षा पहुंच अभी भी एक बड़ी समस्या है.