Fake Milk:अब झट से पकड़ लेंगे नकली दूध का खेल,अपनाएं मिनटों वाला ये देशी ट्रिक

Fake Milk:अब झट से पकड़ लेंगे नकली दूध का खेल,अपनाएं मिनटों वाला ये देशी ट्रिक


खरगोन. त्योहारों के दिनों में घर-घर में दूध और मावा की सबसे ज्यादा खपत होती है. महिलाएं खासतौर पर हरतालिका तीज, हलछट जैसे अवसर पर मावा से बनी मिठाइयों और पकवानों का सेवन करती हैं. तो वहीं गणेश उत्सव में भगवान को मिठाई का भोग लगाया जाता है. लेकिन अक्सर यही चिंता रहती है कि बाजार से जो दूध आ रहा है, वह कितना शुद्ध है? अगर उसमें पानी मिला है तो मावा का वजन कम निकलता है और स्वाद भी बिगड़ जाता है. ऐसे में सवाल यह है कि कैसे पहचानें दूध शुद्ध है या उसमें मिलावट हुई है.

गौरतलब है कि, खाने-पीने की चीजों में मिलावट आजकल आम हो गई है. दूध सबसे ज्यादा मिलावटी चीजों में से एक है. दूध विक्रेता अधिक मुनाफा कमाने के लिए उसमें पानी मिलाकर बेचते हैं. कभी-कभी तो नकली दूध भी तैयार कर दिया जाता है, जिसमें रसायन और स्टार्च जैसी चीजें डाली जाती हैं. जो सेहत के लिए भी हानिकारक हो सकता है.

इस विषय पर खरगोन के 21 साल पुराने अनुभवी दूध विक्रेता देवेंद्र कुशवाह ने लोकल 18 टीम से बात की. उन्होंने बताया कि दूध की शुद्धता पता लगाने के दो तरीके हैं. एक तो मशीनों द्वारा दूसरा घरेलू नुस्खों से द्वारा. इन दोनों ही तरीकों से दूध की क्वालिटी, उसमें मौजूद फेट, प्रोटीन और मावा की मात्रा आसानी से पता की जा सकती है.

मशीनों से दूध की जांच

देवेंद्र कुशवाह ने बताया कि दूध की शुद्धता की जांच के लिए फेटोमीटर मशीन का उपयोग किया जाता है. यह मशीन दूध में मौजूद पानी की मिलावट को केवल 25 से 30 सेकंड में पकड़ लेती है. इसकी कीमत लगभग 50 से 60 हजार रुपए होती है. यह मशीन न सिर्फ पानी की मिलावट बताती है बल्कि दूध में मौजूद फेट (चर्बी), SNF (सॉलिड नॉन फैट), प्रोटीन और मावा की मात्रा भी दिखा देती है.

भैंस के दूध में 6 से 8.5 फेट तक होना चाहिए. इसके साथ ही दूध में SNF (प्रोटीन) का लेवल संतुलित होना जरूरी है. अगर फेट और SNF के आंकड़े मेल खाते हैं तो दूध शुद्ध है. CLR (लैक्टोमीटर रीडिंग) सही आनी चाहिए, तभी दूध की क्वालिटी अच्छी मानी जाती है. यदि एक लीटर दूध से 200 ग्राम से कम मावा निकलता है तो यह पक्का संकेत है कि दूध में पानी मिलाया गया है.

घरेलू नुस्खे से पहचान दूध में पानी की मिलावट

1. एक लीटर दूध से 200 से 320 ग्राम मावा बनना चाहिए. इससे कम निकले तो दूध मिलावटी है.

2. दूध उबालने पर अगर गाढ़ी मलाई आए तो दूध शुद्ध है. पतली या न के बराबर मलाई आई तो समझ लें पानी मिला है.

3. डेयरी से लिया दूध बर्तन या पन्नी में चिपक जाए तो यह दूध प्योर है.

4. अगर दूध का स्वाद पतला या फीका लगे तो इसमें पानी मिला हुआ है.

5. शुद्ध दूध में प्राकृतिक मिठास होती है, मिलावटी दूध में मिठास बहुत कम या गायब हो जाती है.

नकली दूध की पहचान

देवेंद्र कुशवाह ने यह भी बताया कि कई बार दूध में सिर्फ पानी नहीं, बल्कि नकली केमिकल भी मिलाए जाते हैं. जो हमारे शरीर लिए हानिकारक हो सकता है. कई बीमारियों को जन्म दे सकता है. ऐसे में ध्यान रखें कि,

1. असली दूध का रंग एकदम सफेद और प्राकृतिक होगा, जबकि नकली दूध का रंग हल्का पीला या भूरा लगेगा.

2. असली दूध पीने में हल्की मिठास और चिकनाहट देगा, नकली दूध पीने पर कड़वा स्वाद महसूस होगा.

3. असली दूध देर से खराब होता है, जबकि नकली दूध उबालने के बाद भी जल्दी फट जाता है.



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