गेहूं का चोकर, सरसों की खली से बनती ये खास चॉकलेट, पशुओं को खिलाने से बहने लगती दूध की धारा!

गेहूं का चोकर, सरसों की खली से बनती ये खास चॉकलेट, पशुओं को खिलाने से बहने लगती दूध की धारा!


दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि चॉकलेट सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि गाय-भैंस के लिए भी फायदेमंद हो सकती है. जी हां, वैज्ञानिकों ने खासतौर पर दूध देने वाले पशुओं के लिए एक विशेष प्रकार की चॉकलेट तैयार की ह. यह सामान्य मिठाई वाली चॉकलेट नहीं, बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर एक “पशु चॉकलेट” है. इसे खिलाने से न सिर्फ दूध का उत्पादन बढ़ता है, बल्कि पशु ज्यादा स्वस्थ और तंदुरुस्त भी रहते हैं.

क्या है यह चॉकलेट?
यह खास चॉकलेट दरअसल एक तरह का पूरक आहार है. इसमें गेहूं का चोकर, सरसों की खल, खनिज पदार्थ जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और कॉपर, साथ ही नमक और आवश्यक ऊर्जा देने वाले तत्व शामिल होते हैं. इसे इस तरह तैयार किया गया है कि पशु आसानी से खा सकें और उनका पाचन तंत्र भी सही बना रहे.

दूध उत्पादन कैसे बढ़ाती है?
पशु चॉकलेट में मौजूद पोषक तत्व शरीर में प्रोटीन और खनिजों की कमी को पूरा करते हैं. इससे गाय-भैंस को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और पाचन तंत्र संतुलित रहता है. जब पाचन ठीक रहता है तो पशु अच्छे से चारा खाते हैं और पोषण उनके शरीर में सही तरीके से पहुंचता है. नतीजा यह होता है कि दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार आता है.

शोध और अनुभव क्या कहते हैं?
पशुपालन वैज्ञानिकों ने कई बार इसका परीक्षण किया है. जिन पशुओं को नियमित रूप से यह चॉकलेट खिलाई गई, उनके दूध में करीब पच्चीस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई. पहले जहां एक भैंस औसतन छह लीटर दूध देती थी, वहीं चॉकलेट खाने के बाद वह सात से आठ लीटर तक दूध देने लगी. इतना ही नहीं, पशुओं की प्रजनन क्षमता में भी सुधार आया. बच्चा होने के बाद वे जल्दी स्वस्थ होने लगीं और दोबारा गर्भधारण करने में सक्षम हो गईं.

पशु स्वास्थ्य पर असर
यह चॉकलेट सिर्फ दूध ही नहीं बढ़ाती बल्कि पशु को बीमारियों से भी बचाती है. इसमें मौजूद खनिज पदार्थ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं. नियमित सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं कम होती हैं, कमजोरी दूर होती है और पशु ज्यादा सक्रिय रहते हैं.

क्यों है जरूरी?
कई बार पशुपालक सिर्फ हरा चारा या सूखा चारा खिलाकर संतुष्ट हो जाते हैं. लेकिन इसमें सभी जरूरी पोषक तत्व नहीं होते. नतीजतन दूध की मात्रा घट जाती है और पशु बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं. ऐसे में यह चॉकलेट एक सस्ता और आसान विकल्प है जो पोषण की कमी पूरी करता है.

वैश्विक स्तर पर प्रयोग
दुनिया के कई देशों में दूध देने वाले पशुओं को चॉकलेट या बेकरी से जुड़े बाय-प्रोडक्ट्स खिलाए जाते हैं. इससे दूध उत्पादन बढ़ता है और पर्यावरण को भी फायदा होता है क्योंकि बेकार हो रही खाद्य सामग्री का उपयोग पशुओं के आहार में कर लिया जाता है. भारत में भी यह प्रयोग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

कैसे कराएं सेवन?
पशुपालक इसे दिन में एक या दो बार थोड़ी मात्रा में दे सकते हैं. शुरुआत में कम मात्रा दें ताकि पशु इसकी आदत डाल सके. धीरे-धीरे इसे नियमित आहार का हिस्सा बना दें.



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