मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते कहा कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अशासकीय अनुदान प्राप्त संस्थानों में नई नियुक्तियों पर तो प्रतिबंध है, लेकिन पदोन्नति पर नहीं। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को प्रोफेसर पद पर प
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यह निर्णय हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ द्वारा सुनवाई के बाद दिया गया।
25 सालों से कर रहे सेवा, फिर भी नहीं मिली पदोन्नति
याचिकाकर्ता डॉ. ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, निवासी जबलपुर, ने कोर्ट को बताया कि वे पिछले 25 सालों से अनुदान प्राप्त अशासकीय जीएस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हैं। उन्हें सीनियर स्केल मिल चुका है, लेकिन उन्हें प्रोफेसर पद पर पदोन्नति नहीं दी जा रही, जिससे वे यूजीसी वेतनमान के तहत एजीपी (एकेडमिक ग्रेड पे) के लाभ से वंचित हैं। साथ ही, प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य बनने का अवसर भी समाप्त हो रहा है।
राज्य सरकार ने रखा अपना पक्ष
राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि एक पूर्व परिपत्र के अनुसार सरकार अशासकीय अनुदान प्राप्त संस्थानों में रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं करेगी, इसीलिए याचिकाकर्ता का दावा निरस्त किया गया था।
हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सरकार का यह नियम नई नियुक्तियों पर लागू होता है, पदोन्नति पर नहीं। कोर्ट ने यह भी पाया कि पूर्व में भी कई मामलों में असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दी गई है।
इस आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को प्रोन्नति देने के निर्देश जारी किए हैं।