पटवारी भर्ती विवाद, कट-ऑफ डेट के बाद की डिग्री अमान्य: ग्वालियर हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 2008 के बाद ली थी कंप्यूटर डिग्री – Gwalior News

पटवारी भर्ती विवाद, कट-ऑफ डेट के बाद की डिग्री अमान्य:  ग्वालियर हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 2008 के बाद ली थी कंप्यूटर डिग्री – Gwalior News



मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने साफ कर दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में कट-ऑफ डेट के बाद प्राप्त की गई शैक्षणिक योग्यता मान्य नहीं होगी। अदालत ने 2008 की पटवारी भर्ती से जुड़े एक मामले में सूरज सिंह राजपूत की याचिका खारिज कर दी। राजपूत ने कंप

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मामला क्या है

2008 में पटवारी भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। इसमें स्पष्ट रूप से शर्त रखी गई थी कि उम्मीदवार के पास 7 जुलाई 2008 तक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और कंप्यूटर डिप्लोमा होना जरूरी है। सूरज सिंह राजपूत ने आवेदन किया, चयन भी हुआ और 2010 में उन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर लिया। फरवरी 2011 में उनकी नियुक्ति कर दी गई।

दस्तावेज़ों की जांच में विभाग को पता चला कि राजपूत ने कंप्यूटर डिप्लोमा 29 जून 2009 को प्राप्त किया था, जो कट-ऑफ डेट से लगभग एक साल बाद था। इस आधार पर 2012 में उन्हें नोटिस जारी कर सेवा से हटा दिया गया।

याचिकाकर्ता का पक्ष

राजपूत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर तर्क दिया कि चयन और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी योग्यता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने यह भी दलील दी कि कई अन्य उम्मीदवारों को इस तरह का लाभ दिया गया था, इसलिए उनके साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार के अधिवक्ता जी.के. अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती नियमों में कट-ऑफ डेट का विशेष महत्व होता है। इसके बाद ली गई डिग्री को किसी भी सूरत में मान्य नहीं किया जा सकता।

कोर्ट का निर्णय

  • कोर्ट ने कहा कि कट-ऑफ डेट तक योग्यता पूर्ण न होने पर बाद में ली गई डिग्री भर्ती के लिए मान्य नहीं होगी।
  • यदि किसी को गलती से लाभ मिल भी गया है, तो अन्य उम्मीदवार उस आधार पर समानता का दावा नहीं कर सकते।
  • चूंकि सूरज सिंह राजपूत ने आवश्यक योग्यता 29 जून 2009 को हासिल की, जबकि अंतिम तिथि 7 जुलाई 2008 थी, इसलिए विभाग द्वारा उनकी सेवा समाप्त करना पूरी तरह से विधिसम्मत है।



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