जून महीने में गांव के करीब 300 लोग इकट्ठा हुए और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि गांव में कोई भी व्यक्ति शराब पीकर गाली-गलौज करेगा तो उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं, अगर कोई गांव में अवैध शराब बेचता पकड़ा गया तो उसे 11,000 रुपये का दंड भरना होगा. अब तक गांव में इस नियम के तहत 50,000 रुपये से अधिक जुर्माना वसूला जा चुका है. यह राशि गांव में बन रहे शनि मंदिर के निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही है.
खास बात ये कि यह अभियान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है. गांव का हर बच्चा इस नियम को गंभीरता से ले रहा है और शराबबंदी तोड़ने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाया जा रहा है. यही कारण है कि आसपास के गांव भी नीमोन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
अब तक 15 गांवों में लागू हुई शराबबंदी
नीमोन की पहल से प्रभावित होकर अब तक राखसी, पड़वार, हनोता उवारी, रोंड़ा, भरतपुर, उल्दन, पजनारी, बरखेड़ा, पिथौली, भारती नगर, गनयारी, बहरोल, बिचपुरी, किरोला और कुल्ल सहित 15 गांवों में शराबबंदी लागू हो चुकी है. इन गांवों में अब तक 10 हजार से ज्यादा लोग शराब न पीने और न बेचने का संकल्प ले चुके हैं.
नीमोन गांव के गब्बर सिंह लोधी बताते हैं कि गांव से शराब की दुकान (कलारी) केवल डेढ़ किलोमीटर दूर है, लेकिन शराबबंदी के फैसले ने शराबियों पर नकेल कस दी है. इससे न केवल घरों में विवाद कम होंगे, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी. जो पैसा पहले शराब में खर्च होता था, अब गांव के विकास और धार्मिक कार्यों में लगेगा.
दूसरे गांव भी ले रहे प्रेरणा
वहीं, कल्याण सिंह लोधी का कहना है कि यह निर्णय किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पूरे गांव ने मिलकर लिया है. इसी वजह से सभी लोग इसे गंभीरता से निभा रहे हैं. उन्होंने खुशी जताई कि अब हमारे गांव से प्रेरणा लेकर एक दर्जन से अधिक गांवों में शराबबंदी लागू हो चुकी है.