धान के खेत में डाल दें ये 10 पत्तियों वाला अर्क, सारे कीट हो जाएंगे छूमंतर

धान के खेत में डाल दें ये 10 पत्तियों वाला अर्क, सारे कीट हो जाएंगे छूमंतर


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Agriculture News: इस घोल में पांच किलो नीम की पत्ती, दो-दो किलो सीताफल, बेल, अमरूद, बेर, पपीते, कनेर, आम, देशी करेले और आम की पत्तियां डाल दें. इसके बाद इसमें आधा से एक किलो तक तम्बाकू और आधा किलो चटनी डाल दें.

बालाघाट. इंसानों ने सालों पहले ज्यादा उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करना शुरू किया लेकिन समय के साथ उर्वरकों का इस्तेमाल कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है. इसके परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं. इसके इस्तेमाल से स्वास्थ्य से लेकर जैव विविधता पर भी असर पड़ रहा है. खेतों पर निर्भर रहने वाले पक्षी और मित्र कीट भी नष्ट हो रहे हैं लेकिन इससे बचने के लिए कुछ उपाय भी हैं. किसान भाई कुछ जैविक उर्वरकों का इस्तेमाल कर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम कर सकते हैं.

खेत में लगातार रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से फसल और भूमि पर सीधा प्रभाव पड़ता है. यह भी देखा गया है कि कीट रासायनिक उर्वरकों और दवाइयों के प्रति रेजिस्टेंस पावर भी बढ़ा लेते हैं. ऐसे में रासायनिक दवाइयां बेअसर होने लगती हैं. फसल में हर साल ज्यादा कीट लगते हैं. अगर रासायनिक उर्वरकों की आदत छोड़नी है, तो कृषि को वापस जैविक की तरफ लौटना पड़ेगा. ऐसे में हम आपको फसल को कीटों से बचाने के लिए जैविक कीटनाशक के बारे में बता रहे हैं. इसे दशपर्णी अर्क के नाम से भी जाना जाता है.

ऐसे बनता है दशपर्णी अर्क
दशपर्णी अर्क में 10 तरह की पत्तियों का इस्तेमाल होता है. इसमें उन पत्तियों का इस्तेमाल होता है, जिसे बकरी नहीं खाती है. दशपर्णी अर्क बनाने के लिए एक ड्रम में 200 लीटर पानी डालें. इसमें 10 लीटर गौमूत्र और दो किलोग्राम देशी गाय का गोबर मिलाकर अच्छे से घोल बना लें. इस घोल में पांच किलोग्राम नीम की पत्ती, दो-दो किलोग्राम सीताफल, बेल, बेर, पपीते, अमरूद, कनेर, आम, देशी करेले और आम की पत्तियां डाल दें. इसके बाद इसमें आधा से एक किलोग्राम तक तम्बाकू और आधा किलो चटनी डाल दें. इस घोल को छाया में रखें और बारिश के पानी और सूर्य की रोशनी से बचाएं. 40 दिन में इससे दवा तैयार हो जाएगी. इसे कपड़े से छानकर अलग कर लें. 200 लीटर पानी में यह 5 से 6 लीटर दशपर्णी अर्क कीट नियंत्रण के लिए किसी भी फसल पर छिड़का जा सकता है.

कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचना है, तो…
रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से खेतों में पैदा होने वाला अनाज प्रदूषित हो गया है. इसके सेवन से कैंसर समेत अन्य घातक बीमारियां हो रही हैं. इन बीमारियों से बचाव के लिए खेतों में रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का इस्तेमाल बंद कर उनके स्थान पर जैविक और प्राकृतिक खाद और कीटनाशक का उपयोग करना होगा.

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