सीएस की आपत्ति के बाद प्रस्ताव खारिज: निकाय अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की अवधि साढ़े 4 साल नहीं होगी – Bhopal News

सीएस की आपत्ति के बाद प्रस्ताव खारिज:  निकाय अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की अवधि साढ़े 4 साल नहीं होगी – Bhopal News


मप्र सरकार को नगरीय निकाय अध्यक्षों को अविश्वास प्रस्ताव से बचाने की कोशिश में झटका लगा है। सरकार अवधि 3 साल से बढ़ाकर साढ़े 4 साल करना चाहती थी, लेकिन चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन की आपत्ति के बाद प्रस्ताव खारिज हो गया। अब वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नगरपा

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2014 तक निकाय चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होते थे। 2019 में चुनाव नहीं हुए और कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू कर दी। 2022 के चुनाव से पहले धारा 47 को हटा दिया गया था। अब सरकार इसे बहाल करना चाहती है। नगरीय प्रशासन से प्रस्ताव तैयार होकर विधि विभाग भेजा गया है। इसके बाद सीनियर सेक्रेटरी समिति और कैबिनेट में रखा जाएगा। सहमति मिलने के बाद अध्यादेश लाया जाएगा। सरकार जल्द इसे कैबिनेट में पेश करने की तैयारी कर रही है।

बीते साल हुआ था परिवर्तन: 2024 में कई निकायों में विपक्ष ने अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी शुरू कर दी थी। इसे रोकने के लिए सरकार ने दो बड़े बदलाव किए। पहला अविश्वास प्रस्ताव लाने की अवधि दो से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई।

असर यह भीः कई निकायों में अध्यक्षों पर फिर अविश्वास का खतरा बढ़ गया है

अगस्त 2025 में अध्यक्षों का कार्यकाल तीन साल पूरा होते ही कई निकायों में फिर अविश्वास प्रस्ताव का खतरा बढ़ गया। इसके बाद नगरपालिका और नगर परिषद संघ की मांग पर सरकार ने अवधि तीन साल से बढ़ाकर साढ़े चार साल करने की तैयारी की। यदि अवधि बढ़ा दी जाती तो अविश्वास प्रस्ताव लगभग असंभव हो जाता, क्योंकि अंतिम छह महीनों में चुनाव कराने का प्रावधान पहले से मौजूद है।



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