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Agriculture News: मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती को पीला मोजैक वायरस और सफेद मक्खी (व्हाइटफ्लाई) ने बर्बाद कर दिया है. यह रोग तेजी से फसल को प्रभावित करता है.
पीला मोजैक को लेकर भारत सरकार के इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर मुरैना में पदस्थ प्लांट प्रोटक्शन ऑफीसर सुनीत कटियार बताते हैं कि पिछले कई सालों से हम देख रहे हैं कि सोयाबीन की फसल मध्य प्रदेश में जो उगाई जाती है. उसमें सबसे ज्यादा समस्या येलो मोजेक जिसे पीला मोजेक भी कहते हैं. इसी की आ रही है, एक दो बीमारी और होती है, लेकिन उनका उतना प्रभाव नहीं है. पीला मोजैक रोग लगने पर पौधे के पत्ते पीले होकर सूखकर जमीन पर गिर जाते हैं और फिर इसमें फलन नहीं होता है, जिसकी वजह से किसानों की खाद बीज और मेहनत सब बर्बाद हो जाती है.
अब सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों को इस बात का ध्यान रखना है कि जहां पर भी उनके खेत है जहां सोयाबीन की फसल को उग रहे हैं. इसकी मॉनिटरिंग निगरानी शुरू से ही करने की आवश्यकता होती है. अगर हमें अपने सोयाबीन के खेत में एक भी पीला पौधा दिखाई दे रहा है और लगता है कि इसमें रोग का इफेक्ट आ गया है, तो उस पौधे को पॉलिथीन से अच्छे से कर करें और जड़ से काट दें फिर या तो इस पौधे को जला दें या कहीं गड्ढा करके दबा दें ऐसे कम मात्रा में जितने भी पौधे हैं उनके साथ ऐसा ही करें.
इसके बाद अगर हमें लग रहा है कि सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ रहा है, तो नीम तेल का भी उपयोग कर सकते हैं. 1500 ppm नीम तेल का उपयोग मक्खी नियंत्रण में कर सकते हैं.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें
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