चेहरे के एक तरफ होंठ से सिर तक करंट लगने का एहसास सुसाइड डिजीज का संकेत है। इसको यह नाम इसमें होने वाले तीव्र दर्द के कारण मिला है, जिससे राहत पाने के लिए लोग आत्महत्या तक की इच्छा जताते हैं। इसी दर्दनाक बीमारी से पीड़ित दो मरीज बीते 7 दिन में गांधी
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जीएमसी से मिली जानकारी के अनुसार, इस बीमारी को मेडिकल भाषा में ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया कहा जाता है। करीब एक लाख लोगों में से 10 को यह बीमारी होती है। इससे बॉलीवुड एक्टर सलमान खान भी पीड़ित रहे हैं, जिन्होंने अपना इलाज अमेरिका के एक बड़े अस्पताल में कराया था। इसका सबसे बेहतर इलाज अब भोपाल में भी उपलब्ध है। इसमें न तो सर्जरी होती है और न लंबा इलाज। सिर्फ एक इंजेक्शन की मदद से बीमारी को जड़ से खत्म किया जाता है।
इन केस से समझें बीमारी कितनी पीड़ादायक
केस एक– दो साल में कराई दो सर्जरी, फिर पहुंचे पेन क्लिनिक सुभाष नामक मरीज में यह रोग दो साल पहले उभरा। शुरुआत में उन्होंने इसे दांत का दर्द समझकर पेन किलर खाना शुरू किया। राहत न मिलने पर लगातार दवाइयां लेते रहे। स्थायी इलाज के लिए निजी अस्पताल गए, जहां दो साल में उनकी दो सर्जरी हुईं। लेकिन फिर भी दर्द कम नहीं हुआ। बाद में रिश्तेदार की सलाह पर पेन क्लिनिक आए, जहां सिर्फ एक इंजेक्शन से उन्हें राहत मिल गई।
केस दो– डेढ़ साल बाद छू पाए अपना गाल राम नारायण कुशवाहा नामक बुजुर्ग में यह रोग डेढ़ साल पहले उजागर हुआ। लंबे समय तक उन्होंने पेन किलर से राहत पाने की कोशिश की, लेकिन दर्द बढ़ता गया। पहले निजी अस्पताल पहुंचे, फिर बेहतर इलाज की तलाश में हमीदिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग पहुंचे। वहां से उन्हें पेन क्लिनिक रेफर किया गया। उनका कहना है कि इलाज के बाद डेढ़ साल में पहली बार ऐसा हुआ, जब गाल छूने पर दर्द नहीं हुआ।
रोग के इलाज में इंजेक्शन का रोल यह इतनी खतरनाक बीमारी है कि चेहरे पर हवा लगने से भी मरीज को करंट जैसा दर्द महसूस होता है। बीमारी की पहचान एमआरआई रिपोर्ट से होती है, जिसमें यह पता चलता है कि चेहरे पर मौजूद ट्राइजेमिनल नर्व (दिमाग को एहसास पहुंचाने वाली नस) के आसपास एक प्रकार का गुच्छा बन गया है। इससे नर्व पर दबाव पड़ता है, जो तीव्र दर्द का कारण बनता है।
पेन क्लिनिक के डॉ. जयदीप सिंह ने बताया कि मरीज का इलाज परक्यूटेनियस बैलून कम्प्रेशन तकनीक से किया जाता है। इस तकनीक में मरीज को कोई चीरा या टांका लगाने की जरूरत नहीं होती। खास इंजेक्शन से दर्द का कारण बनने वाली नस में एक विशेष तरल डाला जाता है, जो संबंधित नस को नष्ट कर देता है। इस तरह के ऑपरेशन में लगभग एक घंटे का समय लगता है।