मध्य प्रदेश में चल रहे स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट पर कांग्रेस ने डेटा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने दावा किया है कि इस पूरे मामले में केंद्र और राज्य सरकार की
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मुख्य आरोप यह है कि अल्फानार नामक कंपनी, जिसे पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अयोग्य घोषित कर दिया था, वही कंपनी मध्य क्षेत्र और पूर्व क्षेत्र जबलपुर में ठेके हासिल कर गई। यह दोहरा मापदंड प्रशासन की ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा बताया कि अल्फानार ने मीटर डेटा मैनेजमेंट के तहत उपभोक्ताओं का संवेदनशील डेटा सीधे UAE स्थित Esyasoft कंपनी को भेजा, जिसमें बिजली उपयोग और निजी जानकारी शामिल थी। उन्होंने इसे केवल गोपनीयता का उल्लंघन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया।
आरोप है कि Esyasoft के UAE ऑफिस और अल्फानार के बोर्ड में पाकिस्तानी नागरिक कार्यरत हैं। स्मार्ट मीटर में GPS तकनीक होने के कारण उपभोक्ताओं का लोकेशन डेटा भी विदेशी हाथों में जा रहा है। इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम ने भी इस खतरे के बारे में सरकार को चेतावनी दी थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया।
आरोप लगाया गया है कि अल्फानार कंपनी ने नियमों के बावजूद DPIIT सर्टिफिकेट नहीं लिया। यह सर्टिफिकेट उन विदेशी कंपनियों के लिए अनिवार्य है जो भारत की सीमाओं से लगे देशों में भी काम करती हैं। यह खुलासा हुआ है कि अल्फानार चीन और बांग्लादेश में भी सोलर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, इसके बावजूद उसे मध्य प्रदेश में काम करने दिया गया।
सौरभ शर्मा ने बताया कि अल्फानार ने जानबूझकर सबसे कम दर पर टेंडर हासिल किया ताकि वह सिस्टम में प्रवेश कर सके। उन्होंने कहा कि इतनी कम दरों पर 10 साल तक प्रोजेक्ट चलाना संभव नहीं है, जिसका सीधा मतलब है कि उनका असली उद्देश्य जनता का डेटा इकट्ठा करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करना है।