प्रदेशभर में चर्चित ग्वालियर के पुलिस कर्मियों द्वारा चलती ट्रेन में झांसी के सराफा कारोबारी से 60 लाख रुपए की ठगी के मामले में आरोपी आरक्षक की बहाली के आदेश न्यायालय ने दिए हैं। न्यायालय के इस आदेश पर अब पुलिस ने एडवोकेट जनरल का अभिमत मांगा जा रहा
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पुलिस कर्मियों की ठगी के बहुचर्चित मामले में एक साल बाद फरियादी सराफा कारोबारी अपने बयान से पलटा। इस मामले में आरोपियों के फुटेज व मोबाइल लोकेशन के महत्वपूर्व साक्ष्य पुलिस पर थे, लेकिन जीआरपी की पड़ताल में आरोपियों की शिनाख्त न करने आदि की जानबूझकर की गई गंभीर झोल के कारण सभी आरोपी न्यायालय ने बरी कर दिए।
न्यायालय से बरी होने के बाद ठगी के मामले में आरोपी रहे आरक्षक विवेक पाठक ने न्यायालय में अपनी बहाली के लिए याचिका पेश की। इस याचिका पर न्यायालय ने उसकी बहाली का आदेश दिया है।
आदेश के अनुसार आरोपी विवेक को विभागीय जांच के बिना बर्खास्त िकया गया। उसे जिस आरोप में बर्खास्त किया गया उसमे उसे दोषमुक्त किया गया है। इसलिए आरक्षक को सेवा में बहाल किया जाए। बहाली के बाद आरोपी की विभागीय जांच कर जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है।
झांसी के सराफा कारोबारी राजेश अग्रवाल व सागर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार 17 जून 2021 को जबलपुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस में घटना हुई थी। दोनों व्यापारी 30-30 लाख रुपए लेकर गहने बनवाने के लिए झांसी से दिल्ली जा रहे थे, व्यापारियों के अनुसार वह 25 साल से सराफा कारोबार कर रहे हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था आरोपियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताते हुए ठगी की थी। ट्रेन के डबरा स्टेशन से निकलने के बाद चार युवक इनके पास एस-2 कोच में पहुंचे और खुद को राजस्थान क्राइम ब्रांच का अफसर बताते हुए इनसे रुपए भरे बैग अपने कब्जे में ले लिए और अपने अफसर के पास चलने को कहा। यह युवक व्यापारियों को ट्रेन में इधर से उधर घुमाते रहे और आगरा स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर गायब हो गए। इसके बाद ठगे गए व्यापारी 2 जुलाई 2021 तक झांसी, आगरा व ग्वालियर जीआरपी व पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। इस दौरान घटना में आगरा जीआरपी ने फुटेज भी निकाले थे। आरोपियों के अन्य फुटेज व मोबाइल लोकेशन के साक्ष्य भी पुलिस के पास थे।
ग्वालियर के तत्कालीन एसपी अमित सांघी ने मामला दर्ज कर आरोपियों के फुटेज व अन्य साक्ष्यों से आईजी आफिस की साइबर सेल में तैनात विवेक पाठक, अभिषेक तिवारी, निलंबित पुलिस कर्मी सतेंद्र गुर्जर व आरपीएफ में पदस्थ योगेंद्र गुर्जर व मुखबिर प्रेमनारायण प्रजापति के रूप में शिनाख्त कर गिरफ्तारी की थी। तीन आरक्षकों ने 16-16 लाख रुपए एक को 5 लाख व मुखबिर को 7 लाख रुपए दिए जाने का भी खुलासा पुलिस ने किया था और 58.50 लाख रुपए की बरामदगी भी तत्काल की गई थी। {कोर्ट में ऐसे बयान पलटा था: फरियादी ने एफआईआर के एक साल के अंदर ही फरियादी न्यायालय में एफआईआर के लिए आवेदन देने से पलट गया था। फरियादी ने न्यायालय में बयान पलटते हुए बयान दिया था कि उसने पुलिस को कोई बयान नहीं दिया, उससे पुलिस ने हस्ताक्षर कराए थे।
कार्रवाई की जाएगी ^ठगी के मामले में आरोपी आरक्षक के दोषमुक्त होने के बाद न्यायालय से बहाली के आदेश की जानकारी मिली है। न्यायालय का आदेश मिलने पर आदेश मिलने पर उसका पालन करते हुए कार्रवाई की जाएगी। अरविंद सक्सेना, पुलिस महानिरीक्षक