Aloo Ki Kheti: सितंबर में बो दें ये अगेती किस्में, 70 दिन में बंपर फसल तैयार, नई आलू से लूट लेंगे बाजार

Aloo Ki Kheti: सितंबर में बो दें ये अगेती किस्में, 70 दिन में बंपर फसल तैयार, नई आलू से लूट लेंगे बाजार


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Aloo Ki Kheti: सितंबर में बोई गई अगेती आलू की किस्में किसानों के लिए लाभ का बड़ा अवसर साबित हो सकती हैं. सही तकनीक और किस्म के चयन से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बाजार में इनकी मांग भी किसानों को बेहतर दाम दिल…और पढ़ें

Potato Farming: किसानों के लिए सितंबर का महीना खास मायने रखता है. इस समय आलू की अगेती किस्मों की बुआई का सीजन शुरू होता है. सही किस्म चुनने और उचित तरीके से खेती करने पर किसान महज 70 से 90 दिनों में ही बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं. आलू भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक खाई जाने वाली सब्जी है और इसकी मांग सालभर बनी रहती है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में किसान आलू की खेती करना पसंद करते हैं. सितंबर में अगेती किस्म की बुवाई कर किसान न केवल जल्दी फसल तैयार कर सकते हैं बल्कि अच्छी आमदनी भी हासिल कर सकते हैं.

अगेती किस्मों की बुआई का सही समय
सोहावल विकासखंड की आरएचईओ मीनाक्षी वर्मा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि अगेती किस्में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक उगाई जाती हैं और इनका उत्पादन काल 70 से 90 दिन का होता है. इनमें सबसे प्रमुख किस्में कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी लौकार, कुफरी उदय और हाल ही में आई कुफरी ख्याति हैं. खासतौर पर कुफरी ख्याति केवल 60 से 70 दिन में ही तैयार हो जाती है.

व्यावसायिक और घरेलू उपयोग की खासियत
कुफरी लौकार और कुफरी चंद्रमुखी किस्में व्यावसायिक दृष्टिकोण से बेहद लाभदायक मानी जाती हैं, क्योंकि इनका उपयोग मुख्य रूप से चिप्स बनाने में किया जाता है. वहीं, कुफरी उदय और कुफरी ख्याति जैसी किस्में टेबल पर्पस यानी सीधे खाने के लिए ज्यादा पसंद की जाती हैं. इस तरह किसान बाजार की मांग के अनुसार किस्म का चयन कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं.

खेत की तैयारी का आधुनिक तरीका
अगेती किस्मों से अधिक उत्पादन पाने के लिए खेत की तैयारी बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों के दिनों में खेत की मिट्टी को सॉयल सोलराइजेशन विधि से तैयार करना चाहिए. इसमें खेत को पारदर्शी प्लास्टिक शीट से ढक दिया जाता है जिससे सूर्य की गर्मी मिट्टी का तापमान बढ़ाकर हानिकारक कीट और बीमारियों को नष्ट कर देती है. इसके बाद खेत में 2 से 3 बार जुताई करनी चाहिए और अंतिम जुताई के दौरान 15 से 30 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद (FYM) मिलाना चाहिए. इससे मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ जाते हैं साथ ही खरपतवार कम होते हैं और उत्पादन में स्वाभाविक वृद्धि होती है.

इस बात का भी रखें ध्यान
फसल लगाने के समय पौधों के बीच लगभग 45 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए. वहीं बीजों को 10 से 15 सेंटीमीटर गहराई में बोना सबसे उपयुक्त माना जाता है. यह तरीका पौधों के बेहतर विकास के साथ-साथ पैदावार को भी बढ़ाता है.

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