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Chhatarpur Jaggery: गन्ने के रस को लोहे की कड़ाही में डालते हैं. करीब तीन घंटे बाद इसे आंच से उतार लिया जाता है. इसके बाद जब सीरा ठंडा हो जाता है, तो इसे पांच किलो की बाटी में डाला जाता है. करीब आधे घंटे में यह…और पढ़ें
किसान राजाराम के मुताबिक, पहले गन्ने से सीरा निकालते हैं. यह गन्ना भी गांव में किसान लगाते हैं. गन्ने के रस को लोहे की कड़ाही में डालते हैं. लगभग तीन घंटे बाद इसे आग की आंच से उतार लिया जाता है. इसके बाद जब सीरा ठंडा हो जाता है, तो इसे पांच किलो की बाटी में डाल दिया जाता है. लगभग आधे घंटे में यह जम जाता है. जैसे-जैसे यह गुड़ ठंडा होता जाता है, इसका दाना और भी बढ़िया हो जाता है. जब यह जम जाता है, तो इसे तोड़ने पर यह एकदम बर्फी की तरह बिखर जाता है.
गुड़ में किसी तरह की मिलावट नहीं
उन्होंने कहा कि यहां गुड़ पारंपरिक विधि से बनाया जाता है, जिसमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं होती. देसी तकनीक से तैयार किया गया यह गुड़ अपनी गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए मशहूर है. यही कारण है कि लोग इसे शौक से खरीदते हैं और यह गुड़ दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. राजाराम आगे बताते हैं कि इस गुड़ का भाव 35 से ₹40 किलो होता है. हालांकि मंडी में यह भाव और भी सस्ता हो जाता है लेकिन यहां जो आता है, उसे हम ₹40 किलो के भाव से बेचते हैं. हमारे नजदीक महोबा मंडी है, वहां यह गुड़ 35 से 40 रुपये किलो में बिक जाता है.
आसपास की मंडियों में भेजते हैं गुड़
राजाराम बताते हैं कि हमारे यहां का गुड़ आसपास की मंडियों में जाता है. महोबा मंडी से लेकर पन्ना और छतरपुर की मंडी तक बेचने जाते हैं. इन मंडियों से फिर आगे छत्तीसगढ़ तक भी जाता है. मतलब छतरपुर का गुड़ एमपी के अलावा यूपी और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी चखा जाता है. इसके अलावा जो खरीदार यहां लेने आ जाते हैं, तो उनको यहीं से दे देते हैं.