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Teacher Anil Pal Success Story: आप सभी ने ऐसे शिक्षकों की कहानी जरूर पढ़ी होगी जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है. लेकिन आज हम ऐसे युवा शिक्षक की कहानी बताने जा रहे हैं जिसका सपना एक अच्छा शिक्षक बनना था. लेकिन हालात ऐसे हुए कि वो टीचिंग छोड़ फास्ट फूड बेचने लगे. जानें इस शिक्षक की कहानी.
आप सभी ने ऐसे शिक्षकों की कहानी जरूर पढ़ी होगी जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है. लेकिन आज हम ऐसे युवा शिक्षक की कहानी बताने जा रहे हैं जिसका सपना एक अच्छा शिक्षक बनना था. लेकिन हालात ऐसे हुए कि वो टीचिंग छोड़ फास्ट फूड बेचने लगे. हालांकि, इस काम में उनका भाई भी साथ देता है जिन्होने एमए तक की पढ़ाई की है.

दरअसल, छतरपुर जिले के गुढा कला गांव के रहने वाले अनिल पाल जो उच्च शिक्षित हैं. अनिल ने 12वीं तक की पढ़ाई लवकुश नगर के शासकीय स्कूल से की है. महाराजा छत्रसाल बीएससी कोर्स करने के बाद गणित से एमएससी किया. साथ ही बीएड भी कर रखा है. अनिल की तरह ही उनके भाई ने भी एमए की पढ़ाई की है. बता दें, अनिल छतरपुर शहर में रहकर छात्रों को मैथ्स सब्जेक्ट पढ़ाते थे. लेकिन कोचिंग में बढ़ता कंपटीशन देख अपने गांव वापस आ गए. गांव से लगे शहर में फास्ट फूड का धंधा शुरू किया. जिसमें बढ़िया मुनाफा होता है.

अनिल बताते हैं कि मैं 26 साल का हो गया हूं. मेरी शादी भी हो गई है, एक संतान भी है. छतरपुर शहर में कक्षा 12वीं तक के बच्चों को मैथ्स सब्जेक्ट पढ़ाता था. लेकिन मजा नहीं आ रहा था. कभी-कभी तो पढ़ाते-पढ़ाते सिर दुखने लगता था. इसलिए फास्ट फूड बेचने का काम चुना. इसमें मजा आता है. न कोई चिक-चिक और न कोई झिक-झिक.

पहले कोचिंग से जितनी भी कमाई होती थी. वह खर्च में चली जाती थी. शहर में सबकुछ खरीदकर लेना पड़ता था. अब गांव के घर से लगभग 3 किमी दूर इस छोटे से शहर में फास्ट फूड का धंधा खोल लिया है तो ख़र्च कम होता है और कमाई बढ़िया हो जाती है.

अनिल बताते हैं कि दोपहर 12 बजे से फास्ट फूड ठेला लगा लेते हैं. रात को 9 बजे तक दोनों भाई मेहनत करते हैं. हमारे यहां फिंगर 10 रुपए से शुरू होते हैं. पेटीज 15 रुपए, चाउमिन 10 से 15 रुपए, मोमोज 10 रुपए के 4,<br />रोल 10 से 20 रुपए में खिलाते हैं. अपने धंधे के साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रहे हैं.

अनिल बताते हैं कि यहां हर दिन 300 से 500 ग्राहक आते हैं. आसानी से 5 हजार रुपए का दिन भर में बेच लेते हैं. जिसमें लागत निकालने के बाद 2 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. हम दोनों भाई मेहनत करते हैं. महीने का दोनों मिलकर सस्ता आईफोन खरीदने लायक रुपए आसानी से कमा लेते हैं.

अनिल का मानना है कि अगर ऐसे ही मेहनत करते रहेंगे तो 6 महीने बाद एक चार पहिया वाहन खरीदने की हैसियत जरूर हो जाएगी. बचपन से ही मेहनत करते आए हैं. पढ़ाई भी की लेकिन डिग्रियां लेने के बाद भी जिंदगी की शौकें पूरी नहीं कर पा रहे थे.

अनिल बताते हैं कि अब इस धंधे में हर दिन पैसा आता है. अपनी जिंदगी की जरुरतें पूरी कर रहे हैं. बचपन में से लेकर युवा तक जो शौक़ नहीं कर पाए वो इस धंधे की कमाई से कर रहे हैं. जब मैं कार खरीद लूंगा तो आप मेरा दोबारा इंटरव्यू लेने जरूर आएं. अभी जो बातें कैमरे के सामने नहीं कह पा रहा हूं वो आपसे 6 महीने बाद करुंगा. क्योंकि कंपीटिशन हर जगह है. अभी लोगों के सामने अपने धंधे का प्रचार-प्रसार और इनकम भी रिवील नहीं करना चाहता हूं.