अचानक पहाड़… मची चीख पुकार, सागर के श्रद्धालुओं ने सुनाया वैष्णो देवी हादसे का डरावना मंजर, पढ़कर सिहर जाएंगे

अचानक पहाड़… मची चीख पुकार, सागर के श्रद्धालुओं ने सुनाया वैष्णो देवी हादसे का डरावना मंजर, पढ़कर सिहर जाएंगे


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Vaishno Devi Landslide Survivors: सागर जिले के 45 श्रद्धालु हाल ही में वैष्णो देवी में हुए भीषण लैंडस्लाइड का प्रत्यक्षदर्शी बने. 32 लोगों की मौत के इस हादसे को उन्होंने अपनी आंखों से देखा. किसी को रेनकोट ने बच…और पढ़ें

Sagar News: वैष्णो देवी में कुछ दिन पहले भारी बारिश के बीच लैंड स्लाइड होने से 32 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. जब लैंड स्लाइड हुआ तो उस समय सागर जिले के 45 लोग वहां पर मौजूद थे, जिन्होंने इस भयानक मंजर को अपनी आंखों से देखा और उसे याद करके वह आज भी सिहर जाते हैं. उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं लेकिन इन श्रद्धालुओं की किस्मत अच्छी रही और सभी सुरक्षित वापस लौट आए. इसमें किसी को रेनकोट ने बचा लिया तो किसी को मोबाइल ने बचा लिया.

वैष्णो देवी से लौटे यात्री बताते हैं कि अचानक तेज आवाज आई. पलट कर देखा तो मलवा डला था. टीन शेड टूट गए थे. पहाड़ों से पानी मिट्टी पत्थर आ रहा था. लोग इसमें दबे थे. घायल दौड़ लगाकर भाग रहे थे. उनका कहना है कि दो दिन कटरा में गुजारने पड़े, ट्रेन निरस्त होने से बस से 300 किलोमीटर का सफर करना पड़ा, इन श्रद्धालुओं का कहना है कि वहां का मंजर देखकर ऐसा लग रहा था कि बस आज बच जाए. फिर यहां कभी नहीं आएंगे.

वैष्णो देवी में लैंडस्लाइड के प्रत्यक्षदर्शी जसवंत पटेल बताते हैं कि एक दिन पहले से ही वहां पर बारिश हो रही थी. अर्धकुमारी के पास आकर हम रेनकोट खरीदने लगे. इतने में सामने देखा कि पहाड़ खिसक गया है. लोग उसमें दब गए हैं. कोई रो रहा है, कोई दौड़ रहा है, कोई चिल्ला रहा है. किसी का भाई दब गया तो किसी के मां-बाप नहीं मिल रहे थे. मैं पूरी तरह कांपने लगा था और बहुत घबराहट हो रही थी.

कुछ मिनट पहले ही चाचा का परिवार वहां से निकला था
कमलेश पटेल बताते हैं कि जब यह लैंड स्लाइड हुआ तो उससे ठीक 10 मिनट पहले हमारे चाचा चाचा और उनके बच्चे वहां से निकले थे. हम लोगों ने देखा कि पत्थर गिर रहे हैं. लोग चिल्ला रहे हैं तो जल्द ही सीढ़ियों से नीचे उतरे और अपनों को तलाश में लगे जो कुछ दूर जाकर मिल गए तो हम लोगों को राहत मिली. सौरभ पटेल बताते हैं कि इस यात्रा में श्राइन बोर्ड की भी गलती है. मौसम के वैज्ञानिकों ने 24 तारीख से ही वहां बारिश का रेड अलर्ट जारी कर दिया था तो यात्रा बंद कर देनी चाहिए थी, जो यात्रा 26 सितंबर को बंद की गई इतने लोगों की मौत हो गई, इस घटना को रोका जा सकता था. इसके आगे उन्होंने बताया कि हम लोग 45 लोग थे ट्रेन बंद हो गई थी. दो दिन हम लोग कटरा में फंसे रहे. इसके बाद बस को बुक करा कर जालंधर तक आना पड़ा, फिर ट्रेन से 300 किलोमीटर बस से सफर किया.

‘अचानक बड़े-बड़े पत्थर आए’
विक्की बताते हैं कि जब यह घटना हुई उसके ठीक एक या दो मिनट पहले ही हम लोग वहां से निकले थे और अचानक बड़े-बड़े पत्थर आए कि टीन शेड को चकनाचूर कर दिया. उसके नीचे जितने लोग थे सभी दब गए हम लोगों के पीछे भी हमारे साथी आ रहे थे तब हम लोग घबरा गए, आर्मी वाले सभी को वहां से हटा रहे थे और कह रहे थे जल्दी-जल्दी नीचे जाओ. एक शख्स रो रहा था, हमने पूछा क्या हुआ, तो वह बोला मेरे मम्मी पापा दब गए, मिल नहीं रहे है. उसका हाथ टूटा हुआ था लेकिन हम लोगों के साथी बचे थे. एक साइड खड़े होकर हम लोग इंतजार करने लगे लेकिन कुछ समय बाद उनको आता हुआ देखकर सुकून मिला.

Dallu Slathia

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 6 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 6 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across … और पढ़ें

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हाथ टूटा.. मां-बाप दबे, श्रद्धालुओं ने सुनाया वैष्णो देवी हादसे का डरावना मंजर



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