दिल्ली से आई सीबीआई की टीम ने जबलपुर में बुधवार रात जीआईएफ (आर्डनेंस फैक्ट्री जबलपुर) में छापामार कार्रवाई की है। आरोप है कि फैक्ट्री में पदस्थ डीजीएम दीपक लांबा ने महाराष्ट्र में पोस्टिंग के दौरान ठेकेदार से मिलकर बड़ा भ्रष्टाचार किया था। सीबीआई ने
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अंदेशा यह भी है कि जहां-जहां दीपक लांबा पदस्थ रहे हैं, वहां-वहां उन्होंने फर्जीवाड़ा किया है। इससे पहले इसी फैक्ट्री में पदस्थ एक और अधिकारी के खिलाफ सीबीआई ने कार्रवाई की थी। मामला नागपुर के अंबाझरी फैक्ट्री में निजी फर्म (आटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज) को ठेके में हुए भ्रष्टाचार से संबंधित है। जबलपुर में से पहले डीजीएम दीपक लांबा अंबाझरी फैक्ट्री में पदस्थ थे। आरोप है कि अंबाझरी में डीजीएम रहते लांबा ने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी फर्म को ठेके में लाभ पहुंचाया, जिससे कि सरकार को लाखों रुपए की क्षति हुई थी। इस मामले में सीबीआई की टीम लगातार जांच कर रही थी। पूछताछ के लिए सीबीआई ओएफजे परिसर से लांबा को अपने साथ वाहन में बैठाकर किसी गोपनीय स्थान पर ले गई है, जहां पूछताछ की जा रही है। हालांकि, सीबीआई की ओर से अभी तक डीजीएम की गिरफ्तारी को लेकर पुष्टि नहीं हुई है।
वाईआईएल के अधिकारी ने की थी शिकायत
नागपुर स्थित यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) के उप मुख्य सतर्कता अधिकारी डीकेटी गुप्ता ने सीबीआई को एक शिकायत सौंपी थी। जांच के बाद अंबाझरी फैक्ट्री के तत्कालीन डीजीएम लांबा, ऑटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज और इस फर्म के संचालक मोहित ठोलिया पर 25 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी। सूत्र बताते हैं कि डीजीएम लांबा ने निजी फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया था। सीबीआई छापे में आपत्तिजनक अभिलेख बरामद हुए हैं। कुछ डिजिटल साक्ष्य भी लगे हैं।
डीजीएम ने बनाई फर्म
शुरुआती जांच में पता चला है कि दीपक लांबा ने अंबाझरी फैक्ट्री में डीजीएम रहते हुए एक प्रोप्राइटरशिप फर्म बनाई थी। आटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज नाम की इस फर्म के संचालक मोहित ठाेलिया हैं। जिन्हें डीजीएम का चचेरा भाई बताया था। निजी फर्म के बैंक खातों की जांच में लांबा और उसके परिवार के बैंक खातों में लेन-देन का पता चला है। जिसमें लांबा एवं उसके परिवार के सदस्य जिनमें भाई, पत्नी, बहन और मां शामिल हैं। इनके बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन जांच के दायरे में है। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि चचेरे भाई की निजी सप्लायर फर्म को ठेका देने के लिए डीजीएम लांबा ने निविदा शर्तों में बदलाव किए थे। शर्तों को निजी फर्म के अनुकूल बनाया गया। ठेका प्राप्त करने के लिए फर्म ने जाली अनुभव प्रमाण पत्र लगाए। जिसे भी तत्कालीन डीजीएम लांबा ने अनदेखा किया।