BCCI AGM: भारत में गांव से लेकर संसद तक राजनीति रोमांचक होती है. इसमें अलग-अलग पार्टियों और लोगों के बीच गजब प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है. इसके बीच एक और राजनीति होती है जिस पर लोगों की नजरें होती हैं. वह बीसीसीआई की राजनीति है. एक बार फिर से अखाड़े को सजा दिया गया है और बड़े-बड़े धुरंधर कुछ पदों के लिए अपने-अपने पत्ते निकालेंगे. बोर्ड प्रेसिडेंट से लेकर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के चेयरमैन तक का चुनाव होना है.
आईपीएल चेयरमैन पद के लिए दौड़
सितंबर के अंत में होने वाली बीसीसीआई की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इसमें अध्यक्ष और आईपीएल चेयरमैन सहित कुछ शीर्ष पदों पर नए लोगों की नियुक्ति की जा सकती है. मौजूदा आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल को तीन साल के अनिवार्य ‘कूलिंग-ऑफ’ पीरियड पर जाना पड़ सकता है. वह अपने छह साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. उनके संभावित उत्तराधिकारी के रूप में कई नामों पर विचार चल रहा है. अभी तक देवजीत सैकिया (संयुक्त सचिव), रोहन गाउंस देसाई और प्रभतेज भाटिया (संयुक्त सचिव) अपने पदों पर बने रहेंगे, क्योंकि इनका कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है.
आईपीएल चेयरमैन बनेंगे राजीव शुक्ला
आईपीएल चेयरमैन के पद के लिए मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व सचिव संजय नाइक और मौजूदा बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के नाम सबसे आगे चल रहे हैं. हालांकि अभी तक कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है. यदि कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला फिर से आईपीएल चेयरमैन बनते हैं, तो बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष और बीजेपी नेता राकेश तिवारी बीसीसीआई उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदार बन सकते हैं.
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बीसीसीआई अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन?
एजीएम में सिर्फ कुछ ही पद खाली होने की उम्मीद है. मौजूदा संविधान के अनुसार, रोजर बिन्नी भी जुलाई में अपना 70वां जन्मदिन पूरा करने के बाद फिर से चुने नहीं जा सकते. सबसे दिलचस्प बात यह है कि बीसीसीआई अध्यक्ष के पद के लिए फैसला लेने वाले लोग किसी प्रतिष्ठित भारतीय खिलाड़ी को बिन्नी की जगह पर लाना चाहते हैं. एक अनुभवी बीसीसीआई अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पीटीआई को बताया, “महत्वपूर्ण हितधारकों के बीच यह भावना है कि एक प्रतिष्ठित क्रिकेटर को हमेशा अध्यक्ष चुना जाना चाहिए. सौरव गांगुली एक जाने-माने भारतीय कप्तान थे और रोजर बिन्नी भारत के पहले वर्ल्ड कप विजेता हीरो थे. हालांकि, यह एक बड़ा सवाल है कि ऐसे कितने प्रतिष्ठित क्रिकेटर एक मानद शीर्ष पद लेने में रुचि लेंगे.”
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2020 से उपाध्यक्ष हैं राजीव शुक्ला
राजीव शुक्ला का मामला भी दिलचस्प है. उनका उपाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल 2020 में शुरू हुआ था और लोढ़ा संविधान के अनुसार उनके पास अभी भी एक साल बाकी है. उनके मामले में एक पेंच है- अगर राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम (National Sports Governance Act) 2026 की अगली एजीएम से पहले लागू हो जाता है, तो राज्यसभा सांसद को अनिवार्य ‘कूलिंग-ऑफ’ के लिए जाने की जरूरत नहीं होगी.