‘बेहतर इलाज की बजाय एमवाय ने हमें धोखा दिया’: NICU में भर्ती मासूम के परिजन बोले-बच्ची को गोद में भी उठा नहीं पाए – Madhya Pradesh News

‘बेहतर इलाज की बजाय एमवाय ने हमें धोखा दिया’:  NICU में भर्ती मासूम के परिजन बोले-बच्ची को गोद में भी उठा नहीं पाए – Madhya Pradesh News


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ये कहना है साजिद का। जिनकी बच्ची एमवाय अस्पताल के उसी NICU में भर्ती थी जहां चूहों के काटने से दो नवजातों की मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दोनों बच्चों की चूहों के काटने से मौत नहीं हुई है। दोनों पहले से ही गंभीर हालत में भर्ती थे। साजिद ने अपनी बेटी का पोस्टमॉर्टम करने से भी इनकार कर दिया था।

साजिद कहते हैं कि जब हम लोग बच्ची का शव घर लेकर आए तब उसकी हथेली पर चूहों के काटने के निशान मिले। हम लोगों ने बड़े भरोसे के साथ उसे एमवाय में भर्ती कराया था, लेकिन अस्पताल ने हमें धोखा दिया। साजिद की बेटी को एमवाय में क्यों भर्ती कराया गया था? अस्पताल ने चूहों के काटने वाली बात परिजन को क्यों नहीं बताई? इन सभी सवालों को लेकर भास्कर ने इस परिवार से बात की।

इंदौर के एमवाय अस्पताल के इसी वार्ड में भर्ती थी मासूम

तीन अस्पतालों में दिखाया उसके बाद एमवाय ले गए बच्ची के पिता साजिद बताते हैं कि जब उनकी बेटी का जन्म बागली के सरकारी अस्पताल में हुआ था। डिलीवरी के बाद ही उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी। डॉक्टरों ने जांच की तो पाया कि उसे मल त्यागने में परेशानी हो रही है। इसके बाद हमने उसे तीन अस्पताल ले गए। वहां भी उसका ठीक तरीके से इलाज नहीं हुआ तो एमवाय में भर्ती कराया।

यहां डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि उसके पेट की सर्जरी होगी। साजिद कहते हैं कि सर्जरी के बाद वह रिकवर कर रही थी उसे वेंटिलेटर से हटा दिया था। 2 सितंबर को डॉक्टरों ने बताया कि उसे सांस लेने में समस्या हो रही है, उसे फिर वेंटिलेटर पर रखा। अगले ही दिन हमें बताया कि उसकी मौत हो गई।

कपड़ा हटाया तो पता चला चूहे ने काटा है साजिद कहते हैं कि डॉक्टरों ने हमसे पोस्टमॉर्टम के बारे में पूछा तो हमने मना कर दिया। डॉक्टर्स ने हमें कपड़े में लपेट कर डेड बॉडी भी दे दी, लेकिन ये नहीं बताया कि उसे चूहों ने काटा है। दरअसल, हमें मीडिया के जरिए खबर मिल गई थी कि जिस वार्ड में हमारी बच्ची भर्ती है वहां चूहों ने बच्चों को काटा है।

जब बच्ची की मौत हो गई तो हमने पूछा कि क्या हमारी बच्ची को भी चूहों ने काटा है? तो उन्होंने कहा कि आपकी बच्ची की मौत का चूहे वाले मामले से लेना देना नहीं है। हम लोग उसकी बॉडी लेकर घर पहुंचे और अंतिम क्रिया कर्म के लिए कपड़ा हटाकर उसके शरीर को देखा तो उसकी हथेली पर चूहे के काटने के निशान थे। डॉक्टरों ने हमसे झूठ बोला था।

भले ही वह गंभीर बीमारी से पीड़ित थी और पिछले 15 दिन से जिंदगी और मौत से लड़ रही थी लेकिन मरने से पहले चूहों ने उसे काटा था।

मां बोली- अस्पताल ने बेटी को चूहों के हवाले कर दिया बच्ची की मां रेहाना का रो-रोकर बुरा हाल है। रेहाना ने भास्कर से बात की मगर वह कैमरे पर नहीं आई। वह बोली- मैं अपनी बच्ची को अपना दूध तक नहीं पिला पाई। मैं उसे 15 दिन तक सिर्फ दूर से देखती रही लेकिन कभी उसे छू नहीं पाई। बेटी को मौत से पहले चूहों ने काटा है, ये बात मेरे जेहन से निकल नहीं पा रही है। हम अस्पताल के भरोसे बैठे थे और अस्पताल ने हमारी बच्ची को चूहों को सौंप दिया।

एमवाय लाए क्योंकि रिस्क नहीं ले सकते थे- मामा बच्ची के मामा का नाम भी साजिद है। वो कहते हैं कि हम छोटी जगह के लोग हैं। एमवाय से बढ़िया किसी अस्पताल को नहीं समझते हैं। दो-तीन प्राइवेट डॉक्टरों से भी पूछा था कि कहां लेकर जाएं? उनका भी यही कहना था कि बच्चों के लिए एमवाय अस्पताल से बेहतर कोई और विकल्प नहीं हैं।

हमने आंख बंद कर डॉक्टर की बात पर भरोसा किया क्योंकि हम बच्ची की जान के साथ बिल्कुल भी रिस्क नहीं लेना चाहते थे। हमें कहा गया कि यहां इलाज भी अच्छा मिलेगा और बच्ची को जिस तरह की देखभाल की जरूरत थी, वैसी देखभाल भी होगी, लेकिन हमारी बच्ची के साथ अस्पताल ने धोखा किया।

जिस दिन चूहों ने काटा उसी रात स्थिति गंभीर हो गई साजिद कहते हैं कि हमें मीडिया के जरिए मालूम चल गया था कि बच्चों को चूहों ने काटा है। जब हमने डॉक्टरों से पूछा कि हमारी बच्ची को भी काटा है क्या? तो डॉक्टरों ने इनकार कर दिया। उन्होंने ये भी कहा कि बच्ची ठीक है, उसमें पहले से सुधार है। मैं उसी रात को उसे देखने गया और फिर से उसका हाल पूछा, तो डॉक्टर बोले- इसकी स्थिति नाजुक है।

उसे फिर से वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया था। मेरे दोस्तों ने भी कॉल कर पूछा था कि चूहों का मैटर तुम्हारे साथ हुआ है क्या? तो मैंने उनसे कहा कि नहीं हमारे साथ नहीं हुआ है। मगर, शक हमें भी हो रहा था। उस वार्ड में केवल चार बच्चे थे। मीडिया में रेहाना का नाम आ गया था, रिश्तेदार मुझसे फोन कर पूछ रहे थे। डॉक्टर और नर्स के भरोसे मैं सभी को इनकार कर रहा था।

एमवाय के NICU में धमाचौकड़ी मचाते चूहे।

एमवाय के NICU में धमाचौकड़ी मचाते चूहे।

परिजन का आरोप- चूहे घुस सकते हैं तो इलाज में लापरवाही भी हो सकती है बच्ची के मामा साजिद का कहना है कि मुझे तो अब ऐसा लग रहा है कि जब उस वार्ड में चूहे घुस सकते हैं तो इलाज में भी लापरवाही जरूर हुई होगी। जहां माता-पिता तक को बच्चों से पास नहीं जाने दिया जा रहा था, वहां चूहे कैसे पहुंच गए? जिनकी ड्यूटी थी वे क्या कर रहे थे? जब इतने बड़े अस्पताल में ऐसी घटनाएं हो रही है तो आदमी किस पर भरोसा करेगा?

हमें लगा कि बच्ची का ऑपरेशन हुआ है इस वजह से तबीयत खराब है। 2 दिन बाद तो उसकी मौत हो गई। हमने पिछले 10 दिन से उसे ठीक से देखा नहीं था। जब उसकी बॉडी हमें सौंपी तो वह कपड़े में लिपटी हुई थी, इसलिए वहां हम उसे देख नहीं सके। जब यहां घर पर आकर देखा, तो उसकी हथेली में खरोंच थी। इसका मतलब है चूहे हमारी बच्ची तक भी पहुंचे थे।

बच्ची की मौत के बाद रिश्तेदारों का घर पर आना-जाना जारी है।

बच्ची की मौत के बाद रिश्तेदारों का घर पर आना-जाना जारी है।

एमवायएच प्रशासन ने बच्चों की मौत पर दीं ये दलीलें

  • जिन दो बच्चों की मौत हुई, उनमें 3 दिन का एक बच्चा मंजू निवासी गदादा जिला धार का था। इसका वजन 1.4 किग्रा था। इसे जन्मजात बीमारी थी। इसकी गंभीरता को देखते हुए ऑपरेशन नहीं किया गया और माता–पिता मृत समझकर छोड़ गए थे। अगले दिन अधीक्षक की सहमति से बच्चे का ऑपरेशन तय था, लेकिन बच्चे की हालत गंभीर बनी रही और उसकी मौत हो गई।
  • दूसरी बच्ची देवास की बागली निवासी रेहाना का था। इसका वजन 1.62 किलो था। इसे पहले जिला चिकित्सालय फिर एमटीएच और फिर एमवाय लाया गया था। यह भी गंभीर हालत में थी। इसे भी जन्मजात बीमारी थी। काफी इन्फेक्शन था। ऑपरेशन 7 दिन पहले किया गया था। वेंटिलेटर सपोर्ट में थी जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
एमवाय में 1994 में पेस्ट कंट्रोल किया गया था, तब 12 हजार चूहे मरे थे।

एमवाय में 1994 में पेस्ट कंट्रोल किया गया था, तब 12 हजार चूहे मरे थे।

घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उठाए ये तीन स्टेप

1.NICU में प्लाय लगाकर बंद किए सुराख: NICU में जहां से चूहों के घुसने की आ‌वाजाही थी। वहां प्लाय लगाकर सुराख बंद कर दिए हैं। इसके साथ ही, पेस्ट कंट्रोल करने को कहा गया है।

2.आउटसोर्स कंपनी पर एक लाख रुपए जुर्माना: इस मामले डीन ने आउटसोर्स एंजाइल कंपनी पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कंपनी को एमओयू निरस्त करने की चेतावनी दी है।

3.डीन ने जांच के लिए बनाई हाई लेवल कमेटी: डीन ने जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई है। कमेटी को 1 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देना है। इसी के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।



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