हलाली डैम के पानी में आधी डूबी फसलें।
विदिशा जिले के सम्राट अशोक सागर परियोजना हलाली डैम के पानी से भोपाल जिले की फसलें 2 से 3 फीट तक डूब गई। 16 से अधिक गांवों में असर है। इसके चलते किसान अब पानी में उतरकर आंदोलन करने लगे हैं। उनकी मांग है कि सरकार मुआवजा दें। इनके साथ जिला पंचायत उपाध्य
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डैम का निर्माण कार्य 1976-77 में हुआ था। जिसमें पानी की निकासी 1508 फीट पर बने बेस्ट बियर से होती थी, लेकिन पिछले 2 साल से पानी निकासी के गेट लगाकर जल निकास को 1508 फीट से ऊपर नहीं जान देने के लिए गेट का निर्माण किया, लेकिन अभी डैम का जलस्तर 1510 फीट तक पहुंच गया है। जिसमें 2 फीट जलस्तर अधिक होने से भोपाल जिले के 16 गांव प्रभावित हो रहे हैं। यहां के सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ जमीन में खड़ी फसल नष्ट हो गई है। इनमें मुख्य रूप से धान और सोयाबीन है।
पांच से छह दिन हुए जिपं उपाध्यक्ष जाट ने बताया कि डैम का पानी खेतों में भरे पांच से छह दिन हो गए हैं। गेट खुलने से पानी जरूर निकल रहा है, लेकिन खेतों में काफी पानी भरा है। किसानों के लिए यह एक जटिल समस्या हो गई है। इसलिए सरकारी स्तर पर किसानों के हित में एक अच्छा निर्णय होना चाहिए।
पानी में उतरे किसानों की 2 तस्वीरें…
पानी में डूबी फसल दिखाते किसान।

हलाली डैम के पानी से फसलें पानी में डूब गई हैं।
इन गेटों को लगाने से क्या फायदा? डैम के पानी को स्थिर नहीं रखा गया है। ऐसे में किसानों का कहना है कि इन गेटों को लगाने का कोई फायदा नहीं है। जलस्तर किसी भी कीमत में 1508 फीट से ऊपर नहीं बढ़ना चाहिए। किसानों की जलस्तर से जो फसलें डूबी हुई हैं, उनका तत्काल सर्वे कराकर शासन इसका मुआवजा दें। जिपं उपाध्यक्ष जाट ने बताया कि पानी की वजह से करोंद खुर्द, मोहनपुर, कडै़य्या, चिलखेड़ो, पिपरिया झुन्नारदार, बुदोर, छत्री, भैंसखेड़ा, रोंझिया की फसलें प्रभावित हुई है।