छतरपुर जिला अस्पताल की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। रविवार को एक पति अपनी बीमार पत्नी को गोद में उठाकर इमरजेंसी वार्ड तक ले गया, क्योंकि न तो एंबुलेंस मिली और न ही अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध था। मरीज की मदद के लिए कोई वार्ड बॉय या गार्ड आगे
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पत्नी को गोद में उठाकर लाया पति गंभीर हालत में पत्नी को लेकर पहुंचे युवक ने बताया कि वह गौरीहार का रहने वाला है। उसकी पत्नी मीरा कई दिनों से सांस और खांसी की बीमारी से परेशान है। स्थानीय अस्पताल में इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला तो डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर किया। लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली, इसलिए उसे बस से 350 रुपए किराया देकर लाना पड़ा। अस्पताल पहुंचने पर भी स्ट्रेचर नहीं मिला और पत्नी को गोद में उठाकर इमरजेंसी तक ले जाना पड़ा।
ड्यूटी किसी और की, दूसरा डॉक्टर मिला इस दौरान इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर नहीं मिले। वीडियो बनाने पर ड्यूटी संभाल रहे डॉक्टर राजकुमार अवस्थी भड़क गए। दरअसल, रविवार को इमरजेंसी में डॉ. नीरज सोनी की ड्यूटी थी और उनके साथ एक निजी बॉडीगार्ड भी कुर्सी पर बैठा नजर आया। वहीं सोमवार सुबह 10 बजे की शिफ्ट में डॉ. आशीष शुक्ला की ड्यूटी थी, लेकिन उनकी जगह राजकुमार अवस्थी मौजूद थे।
गार्ड के साथ बैठ डॉक्टर ने वीडियो बनाने से रोका
सीएमएचओ बोल- जांच के बाद कार्रवाई करेंगे लोगों का सवाल है कि जब अस्पताल में पहले से पुलिस चौकी और गार्डों की तैनाती है, तो डॉक्टर अपने निजी गार्ड क्यों लाते हैं। मरीजों को इलाज कराने में दिक्कत होती है। इधर, सीएमएचओ आरपी गुप्ता ने कहा कि इमरजेंसी में एक डॉक्टर तैनात रहता है, जिसे वार्डों में भी देखना पड़ता है। जल्द ही व्यवस्था सुधारी जाएगी और मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।