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Papaya Planting: वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी बताते है कि पपीते की खेती मे कुछ बातों का ध्यान बहुत जरूरी है. कई वैरायटी मार्केट में उपलब्ध हैं, लेकिन खेती और घरेलू दोनों स्तर पर रेड लेडी 786 (Red Lady 786) और पूसा…और पढ़ें
उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी बताते है कि, पपीते की कई वैरायटी मार्केट में उपलब्ध हैं, लेकिन खेती और घरेलू दोनों स्तर पर रेड लेडी 786 (Red Lady 786) और पूसा ड्वार्फ (Pusa Dwarf) किस्मों की सबसे ज्यादा डिमांड है. रेड लेडी 786 किस्म खासकर किसानों में काफी लोकप्रिय है, क्योंकि यह पौधा डेढ़ से दो मीटर की ऊंचाई पर ही फल देना शुरू कर देता है और एक बार फलना शुरू होने पर लगातार फल मिलता है. वहीं, पूसा ड्वार्फ किस्म घरेलू बागवानी के लिए बढ़िया मानी जाती है, क्योंकि इसकी देखभाल आसान होती है और यह छोटे स्थान पर भी अच्छे फल देती है.
विशेषज्ञ बताते हैं कि पपीते की इन वैरायटी में पौधारोपण से 7 से 8 महीने बाद फल आना शुरू हो जाता है. एक पौधे से औसतन 40 से 60 किलो तक फल आसानी से मिल सकते हैं. फल आकार में बड़े, स्वाद में मीठे और बाजार में अच्छी कीमत देने वाले होते हैं. यही वजह है कि व्यापारी भी सीधे खेत से किसानों से खरीद करना पसंद करते हैं.
रोपण के बाद अपनाए ये तरीका
पपीते की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए खेत की जुताई कर गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना जरूरी है. पौधे को हर 15 दिन में हल्की सिंचाई देने से इसकी जड़ों को मजबूती मिलती है. वहीं, जैविक खाद और नीम का छिड़काव करने से पौधा रोग और कीटों से सुरक्षित रहता है.
घर लगाते समय ध्यान रखें ये बाते
घर की वाटिका में पपीते की खेती करना और भी आसान है. इसके लिए गमले या छोटे गार्डन में 2-3 पौधे लगाकर शुरुआत की जा सकती है. अगर सही देखभाल और समय पर खाद-पानी दिया जाए तो कुछ ही समय में पूरा गार्डन हरे-भरे पेड़ों और फलों से भर जाएगा. इससे घर पर ही ताजे, पौष्टिक और बिना मिलावट वाले पपीते का आनंद लिया जा सकता है.