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बरसात में खासकर बकरियों और दुधारू पशुओं में पैर पकने की समस्या ज्यादा देखी जाती है. इसमें पैरों में सूजन आ जाती है और खुर पक जाते हैं. यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जिसमें खुर में पस भर जाता है और पशु को चलने में…और पढ़ें
बरसात में खासकर बकरियों और दुधारू पशुओं में पैर पकने की समस्या ज्यादा देखी जाती है. इसमें पैरों में सूजन आ जाती है और खुर पक जाते हैं. यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जिसमें खुर में पस भर जाता है और पशु को चलने में कठिनाई होती है. ऐसे में पशु का खाना-पीना भी कम हो जाता है और दूध का उत्पादन अचानक गिर जाता है.
खूरपका-मुंहपका रोग लगने पर पशु को तेज बुखार आता है. मुंह, जीभ, मसूड़ों और ओंठों पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं, जो बाद में बड़े छाले का रूप ले लेते हैं. ये छाले फटकर जख्म बन जाते हैं. इससे पशु जुगाली करना बंद कर देता है, मुंह से लार गिरती रहती है और वह बहुत सुस्त हो जाता है. पैरों के घाव मिट्टी-कीचड़ के संपर्क में आने से और ज्यादा खराब हो जाते हैं और उनमें कीड़े भी पड़ जाते हैं.
बीमार पशु की देखभाल कैसे करे
पशु चिकित्सक डॉ. बीएल पटेल बताते हैं कि इस बीमारी से बचाव के लिए तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय में इलाज कराना चाहिए. कम से कम तीन दिन तक दर्द और सूजन की दवा के साथ एंटीबायोटिक देना जरूरी होता है. रोगग्रस्त पैरों को नीम और पीपल की छाल का काढ़ा या फिनाइलयुक्त पानी से धोकर साफ करना चाहिए. वहीं, मुंह के छालों को फिटकरी के घोल से दिन में तीन बार धोना लाभकारी रहता है. इस दौरान पशु को मुलायम और सुपाच्य भोजन देना चाहिए.
ध्यान रखने योग्य बातें
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि बीमार पशु को हमेशा साफ और हवादार जगह पर रखना जरूरी है. उन्हें अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग करना चाहिए. देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी सावधानी बरतते हुए हाथ-पैर धोकर ही अन्य पशुओं के पास जाना चाहिए. साथ ही, बीमार पशु के लार या घाव के संपर्क में आने वाले पुआल, भूसा और घास को या तो जला देना चाहिए या चूना डालकर गाड़ देना चाहिए, ताकि संक्रमण आगे न फैले.