Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में उज्जैन के इस मंदिर में करें पिंडदान, मिलेगी पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में उज्जैन के इस मंदिर में करें पिंडदान, मिलेगी पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष


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Pitru Paksha 2025: महाकाल की नगरी में कई मंदिर हैं, लेकिन पितृ पक्ष के लिए एक ऐसा मंदिर है, जो विशेष महत्व रखता है. यहां पितृ पक्ष के दौरान सुबह से लेकर शाम तक घंटो लाइन में लोग दूध चढ़ाने के लिए खडे़ रहते हैं. …और पढ़ें

उज्जैन. पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है. इन दिनों सभी अपने पूर्वजों के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए. उनका विशेष रूप से पूजन अर्चन कर रहे हैं. बता दें कि महाकाल कि नगरी में कई ऐसे मंदिर हैं, जो विशेष महत्व रखते हैं. इतना ही नही विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में केवल अकाल मृत्यु के भय से ही मुक्ति नहीं मिलती है, बल्कि यहां मोक्ष की प्राप्ति भी होती है.

दरअसल यह मंदिर उज्जैन के खाक चौक क्षेत्र में स्थित अत्यंत प्राचीन मंदिर “गयाकोटा” के नाम से विख्यात है. यहां 12 महीने भक्तों का तांता लगा रहता है. विशेष रूप से पितृ पक्ष के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु तर्पण व पिंडदान करने के लिए आते हैं. मंदिर परिसर में 16 चरण भी बने हुए हैं, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां दूध अर्पित करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. आइए जानते है इस मंदिर का रोचक इतिहास.

रोजाना लग रहा भक्तो का ताता 
श्राद्ध पक्ष में यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है. हमारे हिंदू पुराणों और शास्त्रों में भी कहा गया है कि देवी देवता की अपेक्षा पितरों का तर्पण पूजन का कर्म करना विशिष्ट है. भारतीय संस्कृति में पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए अपने माता-पिता तथा परिवार के अन्य मृत प्राणियों के निमित्त श्राद्ध करना, पितृ के समक्ष पूजन और तर्पण करना अनिवार्य माना गया है. देश विदेश से भी यहां कई श्रद्धालु अपने पितरों की शांति के लिए आते हैं.

गया कोटा का विशेष महत्व
यह एक सिद्ध तीर्थ है, जहां पर हमारे पितरों के समक्ष पितृ पूजा एवं तर्पण करने से हमारे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही यह कर्म करने से हमारे वंश और जीवन में आनंद की अनुभूति होती है. मन प्रसन्न होता है और जीवन के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है. मान्यता अनुसार जो गया में जाकर एक बार भी श्राद्ध तर्पण कर दे तो उसके सभी पितर सदा के लिए तृप्त हो जाते हैं. इसलिए ही उज्जैन गया कोटा तीर्थ का भी उतना ही महत्व है, जितना की बिहार के गया का महत्व है.

16 चरण का है विशेष महत्व
यहां की मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने गुरु के पुत्रों का तर्पण इसी स्थान पर करवाया था. उन्हीं के द्वारा गया कोटा तीर्थ में 16 चरण बने हुए हैं. एक-एक चरण एक-एक तिथि का है जैसे आज से पूर्णमासी के श्राद चालू हुआ है, जो अमावस्या तिथि पर खत्म होता है. यहां दूध, जल, तुलसी, श्रेवत, अर्पण करने से हमारे पितृ प्रसन्न होते हैं, घर परिवार, धन, दौलत में उन्नति की प्राप्ति होती है.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a… और पढ़ें

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पितृ पक्ष में उज्जैन के इस मंदिर में करें पिंडदान, मिलेगी पूर्वजों को शांति

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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