भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ का अंदाजा इसी बात से लगाइए कि एक तरफ दुबई में चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप ने 4 विकेट लिए और बने मैन आफ दि मैच उसके अगले दिन दलीप ट्राफी के फाइनल में उनकी तरह गेंदबाजी करने वाले कुमार कार्तिकेय साउथ जोन की बल्लेबाजी की कमर तोड़ देते है. ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जब देश को दो बाएं हाथ के स्पिनर अलग अलग मैदानों पर एक साथ चमके.
हाल ही में खेले जा रहे दिलीप ट्रॉफी 2025 के फाइनल में, कुमार कार्तिकेय ने सेंट्रल ज़ोन की ओर से खेलते हुए शानदार गेंदबाज़ी का प्रदर्शन किया. उन्होंने विपक्ष की बल्लेबाज़ी की रीढ़ तोड़ते हुए 4 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए. उनकी गेंदों में वह धार थी जो बड़े मौके पर टीम को जीत दिला सके. न सिर्फ विकेट, बल्कि उन्होंने अपनी कसी हुई गेंदबाज़ी से रन गति को भी रोककर दबाव बनाया, जिससे विरोधी टीम के पास वापसी का मौका नहीं रहा. 21 ओवर में 53 रन देकर 4 विकेट लेने वाले कुमार कार्तिकेय ने मोहित काले,स्मरन रविचंद्रन, और अजहरुद्दीन जैसे बल्लेबाजों को अपना शिकार बनाया.
कुमार कार्तिकेय को सिर्फ “चाइनामैन बॉलर” कहना उनके हुनर को सीमित करना होगा. वह बाएं हाथ के कलाई से स्पिन करने वाले गेंदबाज हैं, जो विविधताओं से भरपूर गेंदबाज़ी करते हैं. उनकी गेंदबाज़ी की ये ख़ास बातें उन्हें ख़ास बनाती हैं. गूगली और स्लोअर वन की मास्टरी उनकी गूगली इतनी सटीक होती है कि बल्लेबाज़ अक्सर चकमा खा जाते हैं. फ्लाइट और टेम्पो में विविधता: वह हवा में गेंद को लंबा उड़ाकर बल्लेबाज़ को ड्राइव करने के लिए ललचाते हैं, और वहीं फंसाते हैं. सतह से मिलाना फायदा: कार्तिकेय पिच की प्रकृति को अच्छी तरह समझते हैं और उसी के अनुसार अपने स्पिन और बाउंस को एडजस्ट करते हैं।मेंटल गेम का उस्ताद: वे सिर्फ गेंदबाज़ नहीं, एक रणनीतिक खिलाड़ी हैं जो बल्लेबाज़ की सोच को पढ़ लेते हैं.
कुमार कार्तिकेय को IPL में मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम में शामिल कर एक बहुमूल्य हीरा खोज निकाला.साल 2022 सीज़न में जब MI का प्रदर्शन चुनौतीपूर्ण था, तब कुमार कार्तिकेय ने अपनी स्किल और शांतचित स्वभाव से सभी का ध्यान खींचा.उनकी गेंदबाज़ी में जो विविधता है, वही उन्हें बाकी युवा स्पिनर्स से अलग बनाती है. MI के कप्तान रोहित शर्मा ने भी उनके “क्रिकेट IQ” की तारीफ़ करते हुए कहा था कि कार्तिकेय जैसे खिलाड़ी मुश्किल परिस्थितियों में टीम के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं.
कुमार कार्तिकेय की यात्रा आसान नहीं रही. उत्तर प्रदेश के एक साधारण परिवार से आने वाले कार्तिकेय ने बेहद सीमित संसाधनों में क्रिकेट सीखा. उन्होंने मध्य प्रदेश में आकर घरेलू क्रिकेट में अपना नाम बनाया और फिर धीरे-धीरे खुद को साबित किया.उनके संघर्ष का एक बड़ा उदाहरण यह है कि उन्होंने कई बार नेट गेंदबाज़ के रूप में IPL टीमों के साथ काम किया, बिना मैच खेले भी खुद को टीम के लिए तैयार रखा. उनका यह समर्पण और धैर्य ही आज उन्हें भारत के प्रमुख चाइनामैन गेंदबाज़ों में गिनवाता है.कुमार कार्तिकेय सिर्फ एक गेंदबाज़ नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की उस नई पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जो अनजाने रास्तों से होकर शीर्ष तक पहुंचती है उनकी कला, मेहनत और लगन इस बात का प्रमाण हैं कि अगर जज़्बा हो, तो कोई मंज़िल दूर नहीं.