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आजकल लोग सुबह देर से उठते हैं, अनियमित भोजन करते हैं और समय पर नहीं सोते, जिसकी वजह से बीमारियां घर करने लगी हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यक्ति 30 साल की उम्र के बाद भी सही दिनचर्या अपनाए, तो वह 100 साल तक स्वस्थ जीवन जी सकेगा. आइए जानते है लंबा जीवन जीने के लिए आयुर्वेद के मुताबिक दिनचर्या कैसी होनी चाहिए?
खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संतोष मौर्य ने कहते है कि, आयुर्वेद के मुताबिक, सुबह उठने का सबसे सही समय ब्रह्म मुहूर्त यानी 4 से 4:30 बजे माना गया है. यदि यह संभव न हो, तो कम से कम सूर्योदय से पहले उठना चाहिए. सुबह उठकर सबसे पहले शौच, ब्रश और हल्की एक्सरसाइज करना जरूरी है. इससे शरीर ताजगी से भर जाता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है.

प्रातः काल में स्नान और व्यायाम का भी शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है. मौसम के अनुसार ठंडे या गुनगुने पानी से स्नान करना चाहिए. स्नान के बाद योग और प्राणायाम करना शरीर को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है.

आयुर्वेद के अनुसार सुबह का नाश्ता 8 से 9 बजे तक कर लेना चाहिए. इसमें घर का बना हल्का और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए. दूध, दही, छाछ और ताजे फलों का सेवन शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. बाहर का जंक फूड और तैलीय खाना स्वास्थ्य को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है.

डॉ. मौर्य बताते हैं कि दोपहर का भोजन 12 से 1 बजे के बीच करना सबसे अच्छा रहता है. इस समय शरीर का पाचन तंत्र सबसे सक्रिय होता है. कोशिश करें कि भोजन में दाल, सब्जी, चावल और रोटी शामिल हों. साथ ही भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना भी पाचन के लिए अच्छा रहता है.

दिनभर काम करके लौटने के बाद सबसे पहले हाथ, पैर और चेहरा धोना चाहिए. यह थकान और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है. रात्रि भोजन 6 से 7 बजे तक कर लेना चाहिए. देर रात का भारी भोजन शरीर को कई बीमारियों की ओर धकेल सकता है.

रात का भोजन हमेशा हल्का रखना चाहिए. इसमें खिचड़ी, दलिया या सूप जैसी चीजें शामिल करना फायदेमंद होता है. खाने के तुरंत बाद लेटने के बजाय 10-15 मिनट टहलना पाचन में मदद करता है.

विशेषज्ञ बताते हैं कि हर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है. इसके लिए रात 10 बजे तक सो जाना चाहिए. पर्याप्त नींद लेने से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है, मानसिक तनाव कम होता है और प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.

अगर कोई व्यक्ति इस आयुर्वेदिक दिनचर्या का पालन करता है तो धीरे-धीरे पेट से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. चिड़चिड़ापन, थकान और तनाव भी कम होने लगता है. इसके अलावा रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है और शरीर हमेशा चुस्त-दुरुस्त रहता है. और 100 साल तक बिना बीमारी के जीवन जिया जा सकता है.