भिंड की कुटुम्ब न्यायालय में चार साल से दहेज के विवाद पर पति पत्नी में.अलगाव बना था। दोनों न्यायालय में आते थे तलाक की बात करते थे। सभी ने सोच लिया था रिश्ता अब बचने वाला नहीं, लेकिन लोक अदालत में पति पत्नी की काउंसलिंग की गई। इस पर दोनों के विचारों
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नेशनल लोक अदालत में शनिवार को चार साल से अलग रह रहे पति-पत्नी का ऐसा मिलन हुआ, जिसने पूरे माहौल को भावुक बना दिया। अब ये जोड़े को नई जिंदगी का तोहफा मिला।
मामला अंजू (भिंड) और उनके पति सुदामा शर्मा पुजारी (अंबाह, मुरैना) से जुड़ा है। शादी के बाद दहेज विवाद ने दोनों को अलग कर दिया था। अंजू ने भरण-पोषण का मुकदमा दायर कर दिया, और सुदामा हर माह 2500 रुपये अदा कर रहे थे। लेकिन परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दिलीप गुप्ता की लगातार समझाइश ने रिश्ते को नई दिशा दे दी।
जहां था बिछड़ाव, वहीं हुआ मिलन लोक अदालत में पति-पत्नी ने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को माला पहनाई और साथ जीने-मरने का वादा किया। सुदामा ने पत्नी की हर खुशी का ख्याल रखने का आश्वासन दिया, जबकि अंजू ने भी नई शुरुआत करने की हामी भरी।
नेशनल लोक अदालत का हाईकोर्ट के न्यायामूर्ति ने किया शुभारंभ जिला न्यायालय परिसर भिंड में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ म.प्र. उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के न्यायमूर्ति मिलिन्द रमेश फड़के ने माँ सरस्वती की प्रतिमा व महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.एस. बारिया, विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दिलीप गुप्ता, एडीजेगण, सीजेएम, कलेक्टर संजय श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव, बार एसोसिएशन अध्यक्ष विनीत मिश्रा, सचिव हिमांशु शर्मा सहित अधिवक्तागण व अधिकारी उपस्थित रहे।
जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 715 लंबित प्रकरणों का निपटारा हुआ। 2045 पक्षकारों को राहत मिली और करीब 2.26 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित हुए। वहीं प्री-लिटिगेशन के 1123 प्रकरणों में भी आपसी समझौते से 1.50 करोड़ रुपए से अधिक राशि पर सहमति बनी।