राजगढ़ का एक साधारण परिवार शनिवार को उस पल का गवाह बना, जिसका सपना बरसों से संजोया जा रहा था। सॉफ्टवेयर इंजीनियर शशांक त्रिपाठी ने पांचवें प्रयास में MPPSC परीक्षा पास कर DSP का पद हासिल किया और यह खबर उन्होंने अपने माता-पिता और बहन को सरप्राइज के रू
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शशांक ने इंदौर के देवी अहिल्याबाई कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद वे एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने और लाखों के पैकेज पर नौकरी करने लगे। लेकिन उनके मन में हमेशा समाज सेवा का सपना था। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की। रोजाना 8 से 10 घंटे की मेहनत और लगातार पांच बार की कोशिश के बाद आखिरकार सफलता उनके कदमों में आई।
बहन ने जैसे ही खबर सुनी वह खुशी से उछलने लगी और DSP भाई के गले लग गई।
पिता वायरलेस विभाग में, मां गृहिणी शशांक के पिता सी.एम त्रिपाठी जिला वायरलेस विभाग में जिम्मेदार पद पर रहे हैं, मां ममता त्रिपाठी गृहिणी हैं और बहन निवेदिता एक स्कूल की प्रिंसिपल हैं। परिवार में अनुशासन और सेवा का माहौल देखकर शशांक ने भी जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
शशांक की शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय, राजगढ़ से हुई। 10वीं की CBSE परीक्षा में उन्होंने सर्वोच्च अंक हासिल किए थे।

इस समय शशांक के माता-पिता भी मौजूद थे।
IPS अफसर बनना चाहते हैं MPPSC 2024 में 105 पदों पर भर्ती हुई थी, जिनमें 19 DSP के पद थे। शशांक ने अनारक्षित वर्ग में चयन पाकर अपने शहर का नाम गौरवान्वित किया। उनका कहना है कि यह तो शुरुआत है। अब वे UPSC की तैयारी करेंगे और IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा करेंगे।

पिता खुशी से तालियां बजाते रहे।

शशांक के पिता वायरलेस में पदस्थ हैं और मां गृहिणी हैं।

शशांक का सपना है कि वह IPS अफसर बनें।