रतलाम में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत के दौरान कुटुंब न्यायालय में भावुक नजारा देखने को मिला। पति-पत्नी के बीच डेढ़ साल से चल रहे मतभेद खत्म हो गए और उन्होंने फिर से साथ रहने का फैसला किया। दोनों की एक बेटी भी है। अदालत में समझाइश के बाद उन्होंन
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पति-पत्नी ने 6 अगस्त 2025 को तलाक के लिए याचिका दायर की थी। लेकिन लोक अदालत में न्यायाधीशों ने उन्हें समझाया कि अलग रहने से बेटी पर विपरीत असर पड़ेगा। साथ रहने से उनके और बेटी के भविष्य में सुधार होगा। समझाइश काम आई और दोनों ने मिलकर वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करने का निर्णय लिया।
चार प्रकरणों में हुई सुलह
लोक अदालत में ऐसे चार प्रकरण आए, जिनमें पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे थे। सभी मामलों में समझाइश देकर दंपतियों को साथ रहने के लिए राजी किया गया। सभी ने एक-दूसरे को माला पहनाई, मिठाई खिलाई और उनके सुखद भविष्य के लिए पौधे भेंट किए गए।
नेशनल लोक अदातल का शुभारंभ करते
दहेज और भरण-पोषण वाले केस भी सुलझे
एक मामले में पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और भरण-पोषण का केस लगाया था। शादी जून 2022 में हुई थी और 5 महीने बाद ही दोनों अलग हो गए थे। अदालत में समझाइश के बाद यह दंपति भी साथ रहने को तैयार हो गया। इसी तरह भरण-पोषण से जुड़े दो अन्य मामलों में भी पति-पत्नी फिर से एक हुए।

1623 में से 1060 मामलों का निपटारा
एडीआर भवन, जिला न्यायालय परिसर में हुई नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष नीना आशापुरे ने किया। जिले में लंबित 1623 समझौता योग्य प्रकरणों में से 1060 का निराकरण किया गया। इसमें 2474 लोग लाभान्वित हुए।