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india versus pakistan: भारत- पाकिस्तान एशिया कप 2025 मैच आज खेला जाएगा. आज पूर्व भारतीय क्रिकेटर निखिल चोपड़ा ने कहा कि पाकिस्तान की टीम संक्रमण के दौर में है. सलमान अली आगा कप्तान हैं, जबकि टीम इंडिया मजबूत है और यशस्वी जायसवाल बाहर हैं.
पाकिस्तान की टीम में ज्यादातर खिलाड़ी नए हैं. (PCB)‘पाकिस्तान के बच्चों को भी अपने प्लेयर्स के नाम नहीं पता’
बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान जैसे अनुभवी सितारों को बाहर कर दिया गया है, ऐसे में टीम की कमान सलमान अली आगा जैसे अपेक्षाकृत नए चेहरे के हाथों में आ गई है. चोपड़ा का एनडीटीवी के शो में कहा कि इस बार का एशिया कप शायद पहला मौका है जब पाकिस्तान को ‘फेवरेट’ नहीं माना जा रहा. पाकिस्तान के बच्चों को भी अपने प्लेयर्स के नाम नहीं पता होंगे. टीम में नई पीढ़ी के खिलाड़ी जैसे साइम अयूब, मोहम्मद हैरिस और हसन नवाज मौजूद हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को साबित करना है. हालांकि, पिछले कोर ग्रुप से केवल शाहीन शाह आफरीदी, हारिस रऊफ और फखर जमां जैसे कुछ चेहरे ही अपनी जगह बचा पाए हैं.
पूर्व क्रिकेटर ने तुलना करते हुए कहा कि 1990 के दशक की पाकिस्तान टीम घर-घर में पहचानी जाती थी. वसीम अकरम, वकार यूनिस, इंजमाम-उल-हक और सईद अनवर जैसे नाम हर बच्चे की जुबान पर थे. लेकिन आज की पाकिस्तान टीम की पहचान उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाई है. चोपड़ा ने यहां तक कहा कि अगर आप सड़क पर किसी क्रिकेट फैन से मौजूदा पाकिस्तान टीम के तीन-चार टॉप खिलाड़ियों के नाम पूछेंगे, तो शायद हर कोई सही जवाब न दे पाए. लेकिन अगर 90 के दशक के हीरो के बारे में पूछें तो हर कोई याद करेगा.
‘हम यशस्वी जैसे बैटर को नहीं दे पा रहे मौका’
इसके उलट चोपड़ा ने टीम इंडिया की मौजूदा स्थिति को बेहद मजबूत बताया. उन्होंने कहा, “भारतीय टीम का हर खिलाड़ी मैच विनर है. चाहे आप आईपीएल के रिकॉर्ड देख लें या टी20 इंटरनेशनल के आंकड़े हर जगह भारतीय क्रिकेटर चमकते हैं. यहां तक कि यशस्वी जायसवाल जैसा धुआंधार बल्लेबाज भी 15 सदस्यीय टीम में जगह नहीं बना पाया. इससे समझा जा सकता है कि चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ के पास टैलेंट की कितनी भरमार है.”
टीम इंडिया में जगह बनाना मुश्किल
यशस्वी का नाम लेते हुए चोपड़ा ने जोर दिया कि जब इतनी क्षमता वाला खिलाड़ी बाहर बैठा है, तो इसका मतलब यह है कि टीम इंडिया की ड्रेसिंग रूम में जगह बनाना अब दुनिया के सबसे मुश्किल कामों में से एक हो चुका है. उन्होंने कहा कि यह ‘गुड हेडेक’ है, जिसका सामना चीफ सेलेक्टर अजीत आगरकर और मैनेजमेंट कर रहे हैं.
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें