4 शुभ योग में अश्विन की मासिक शिवरात्रि, जानें तारीख और पूजा का शुभ समय

4 शुभ योग में अश्विन की मासिक शिवरात्रि, जानें तारीख और पूजा का शुभ समय


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Masik Shivratri in September: मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय या घर के पूर्व हिस्से में बैठकर करने से अधिक फल मिलता है. मासिक शिवरात्रि की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर खुद भोजन करना चाहिए. जो भी श्रद्धालु इस व्रत को पूरे श्रद्धाभाव से करता है, उसके माता-पिता के सारे पाप मिट जाते हैं.

उज्जैन. हिंदू धर्म में हर तिथि और वार का विशेष महत्व होता है. हर महीने शिवरात्रि आती है, जो कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. यह दिन देवों के देव महादेव भोलेनाथ को समर्पित होता है. इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है और भक्त व्रत भी रखते हैं. मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इससे विवाहित महिलाओं के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है जबकि अविवाहितों के लिए शीघ्र विवाह के योग बनते हैं. इस बार अश्विन महीने में मासिक शिवरात्रि कब आ रही है, आइए जानते हैं उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से.

वैदिक पंचांग के अनुसार, अश्विन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 19 सितंबर को रात 11:36 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 21 सितंबर की बीच रात को 12:16 बजे होगा. भगवान शिव की पूजा के लिए मासिक शिवरात्रि पर रात्रिकाल में पूजा करने का विधान है. इस तरह 19 सितंबर को अश्विन मासिक शिवरात्रि मान्य होगी और इसी रात्रि निशा काल में पूजा रात 11:51 बजे से 12:38 बजे तक की जाएगी.

शुभ योग में मासिक शिवरात्रि 
पंचांग के अनुसार, अश्विन शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग, अमृत योग और अमृत सिद्धि शुभ योग बन रहा है. वहीं अभिजीत मुहूर्त और मघा नक्षत्र के संयोग में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने वाले साधक की सभी इच्छाओं की पूर्ति होगी.

मासिक शिवरात्रि व्रत के लाभ
मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है. मासिक शिवरात्रि की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए. जो भी भक्त इस व्रत को पूरे श्रद्धाभाव से करता है, उसके माता-पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और स्वयं के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य और संतान आदि प्राप्त करता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

जरूर करें इन मंत्रों का जाप

ऊं त्रिदलं त्रिगुणाकारम त्रिनेत्रम च त्रिधायुतम्। त्रिजन्म पाप संहारम एक बिल्व शिवार्पणम.

ऊं शिवाय नमः – ऊं सर्वात्मने नमः – ऊं त्रिनेत्राय नमः – ऊं हराय नमः – ऊं इन्द्रमुखाय नमः

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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4 शुभ योग में अश्विन की मासिक शिवरात्रि, जानें तारीख और पूजा का शुभ समय

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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