झाबुआ के सारंगी ग्राम में एक सप्ताह से चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन सोमवार को हो गया। अंतिम दिन पंडित कमलेश शास्त्री ने श्रोताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा भौतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि कृष्ण प्राप्ति की भावना से सुननी चाहिए।
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पंडित शास्त्री ने कहा कि प्रभु के पास जाने से समस्याओं का समाधान स्वतः हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्वार्थ युक्त पूजा, पूजा नहीं कहलाती। कथा में उन्होंने कृष्ण जन्म से लेकर कृष्ण लीला का विस्तृत वर्णन किया।
बुरे स्वभाव वाला व्यक्ति अच्छाई में भी बुराई देखता
शास्त्री जी ने बुराई की आदत वाले व्यक्ति की तुलना मक्खी से की। जैसे मक्खी सुगंध छोड़कर गंदगी पर बैठती है, वैसे ही बुरे स्वभाव वाला व्यक्ति अच्छाई में भी बुराई देखता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान पीढ़ी परंपराओं और संस्कारों को भूल रही है। आने वाली पीढ़ी को श्राद्ध पक्ष और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व समझ नहीं आएगा।
बड़ी संख्या में महिलाएं अंतिम दिन कथा सुनने पहुंची।
कथा पंडाल में रुक्मणी कृष्ण विवाह का आयोजन हुआ। भक्तों ने भजनों पर नृत्य किया। बड़ी संख्या में माताएं-बहनें कथा श्रवण के लिए पहुंचीं। कार्यक्रम का समापन महा आरती के साथ हुआ। आयोजक कैलाशचंद्र पाटीदार परिवार ने महाप्रसादी का वितरण किया।
