आजादी के बाद भी गुलामों जैसी जिंदगी! सिस्टम के मारे इस गांव के लोग, देखें हाल

आजादी के बाद भी गुलामों जैसी जिंदगी! सिस्टम के मारे इस गांव के लोग, देखें हाल


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Ground Report: चिटका देवरी गांव की रजनी उईके ने लोकल 18 से कहा कि उनके गर्भावस्था के दिन चल रहे हैं. ऐसे में उन्हें टीका लगाने के लिए पैदल जाना पड़ता है. उनके गांव में आशा कार्यकर्ता भी नहीं है.

बालाघाट. सड़क खराब होने से कितनी तरह की समस्याएं होती हैं, इसका उदाहरण मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के चिटका देवरी नाम के गांव में देखने को मिला. उस गांव में जाने के लिए सड़क न होने की वजह से डॉक्टर सहित नर्सिंग स्टाफ टीकाकरण के लिए नहीं जाना चाहता है. ऐसे में मजबूरन गांव की गर्भवती महिलाओं, माताओं को अपने नवजातों और छोटे बच्चों को लेकर तीन किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है. अब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. ऐसे में लोकल 18 की टीम उस गांव पहुंची और जानने की कोशिश की कि गांव के हालात क्या हैं.

ग्रामीणों से पता चला कि गांव में आजादी के बाद से आज तक सड़क नहीं बन पाई है. ऐसे में कोई भी स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मी बारिश के दिनों में इस गांव में नहीं आना चाहता है. गांव की गर्भवती महिलाओं और माताओं को छोटे बच्चों के टीकाकरण के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलकर पास के गांव देवरी बुजुर्ग जाना पड़ता है.

टीका लगाने को पैदल जाना पड़ता है
चिटका देवरी गांव की रहने वालीं रजनी उईके लोकल 18 को बताती हैं कि उनके गर्भावस्था के दिन चल रहे हैं. ऐसे में उन्हें टीकाकरण के लिए पैदल चलकर जाना पड़ता है. यहां पर आशा कार्यकर्ता भी नहीं है. कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार टीकाकरण से भी वंचित रहना पड़ता है. गांव में समस्या सिर्फ सड़क की ही नहीं थी बल्कि आंगनवाड़ी भवन भी जर्जर हालत में दिखा.

जर्जर हालत में आंगनवाड़ी भवन
आंगनवाड़ी केंद्र की प्रभारी अनुसुईया भलावी लोकल 18 को बताती हैं कि उन्हें आंगनवाड़ी के संचालन में समस्या आती है. अगर बारिश ज्यादा होती है, तो छत भी टपकने लगती है. ऐसे में आंगनवाड़ी को बंद भी करना पड़ता है. टूटे फर्श पर ही बच्चों को बिठाना पड़ता है. इसकी वजह से कई बार बच्चे गिर भी जाते हैं, जिससे उन्हें चोट लगती है.

बच्चों को भेजने से डरते हैं माता-पिता
गांव की पंच नर्मदा भलावी लोकल 18 को बताती हैं कि आंगनवाड़ी जर्जर हो गई है. वहां की छत और फर्श भी जर्जर हो चुके हैं. बैठने लायक जगह ही नहीं है. माता-पिता अपने बच्चों को भेजने से डरते हैं. ऐसे में आंगनवाड़ी से मिलने वाले पोषण नहीं मिलता है और गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण की सुविधा भी नहीं मिल पाती है. उनके अधिकारों का शोषण हो रहा है.

एक बार बिजली गई और फिर नहीं आई
अनुसुईया भलावी बताती हैं कि यहां पर पहले बिजली कनेक्शन हुआ था. एक बार वायरिंग जल गई लेकिन उसके बाद उसका सुधार नहीं हो पाया. उन्होंने अपने विभाग को इसकी जानकारी दी लेकिन उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो पाया. विभाग के जिम्मेदारों ने पंचायत पर जिम्मेदारी डाल दी लेकिन पंचायत ने भी हाथ खड़े कर दिए. आंगनवाड़ी केंद्र चिटका देवरी में चटाई तक नहीं है. ऐसे में बच्चों को फटी हुई चटाई में बैठना पड़ता है. वहीं बच्चों को खेलने के लिए खेल सामग्री भी नहीं मिलती है. कुल मिलाकर संचालक और ग्रामीणों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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