सोयाबीन के लिए खतरा बना ग्रडल बीटल, एक्सपर्ट ने बताया फसल बचाने का असरदार उपाय

सोयाबीन के लिए खतरा बना ग्रडल बीटल, एक्सपर्ट ने बताया फसल बचाने का असरदार उपाय


खंडवा. मध्य प्रदेश के किसानों के लिए इस साल सोयाबीन की फसल बड़ी चिंता का सबब बन गई है. कई हजारों हेक्टेयर में बुवाई की गई सोयाबीन की फसल अब ग्रडल बीटल कीट की गंभीर समस्या से जूझ रही है. बारिश ने जहां फसलों को नुकसान पहुंचाया है, वहीं इस बीटल ने खेतों में अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है. किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. एक्सपर्ट से जानेंगे कि अपनी कीमती फसल को इस कीट से होने वाली बीमारी से कैसे बचाया जा सकता है. खंडवा निवासी कृषि एक्सपर्ट सुनील पटेल ने लोकल 18 को बताया कि ग्रडल बीटल एक प्रकार का कीट है, जो विशेष रूप से सोयाबीन की फसल को प्रभावित करता है. यह बीटल खेतों में अंडे देता है और उसके लार्वा पौधे की जड़ और तना खाकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं.

उन्होंने बताया कि इसका अटैक आमतौर पर गर्म और बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ता है. जब फसल के ऊपरी हिस्से सूखने लगते हैं और पत्तियां झड़ने लगती हैं, तो यह ग्रडल बीटल के बढ़ते प्रभाव का संकेत होता है. समय पर इलाज न किए जाने पर फसल पूरी तरह खराब हो सकती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

फसल बचाने में जुटे किसान
खंडवा जिले के छोटे-बड़े किसान लगातार अपनी फसल को बचाने की कोशिशों में जुटे हैं. कई किसानों ने बताया कि बारिश के कारण पहले से ही फसल पर बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा था और अब ग्रडल बीटल की समस्या ने इस मुश्किल को और बढ़ा दिया. खेतों में जहां हर तरफ सोयाबीन हरी-भरी नजर आनी चाहिए थी, वहां पत्तियां पीली होकर झड़ रही हैं. किसान अपनी फसल को बचाने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं लेकिन बिना सही जानकारी के उपाय करना मुश्किल हो रहा है.

बचाव के आसान उपाय
कृषि विशेषज्ञ सुनील पटेल ने बताया कि ग्रडल बीटल से बचाव के लिए कुछ सरल लेकिन असरदार उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले फसल में नियमित निरीक्षण करना जरूरी है. खेत में हर पखवाड़े कीट और बीमारी की जांच करनी चाहिए ताकि समय रहते नुकसान का पता चल सके. कीटनाशकों का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि किसानों को सिर्फ मान्यता प्राप्त कीटनाशकों का ही उपयोग करना चाहिए. ग्रडल बीटल के खिलाफ प्रभावी कीटनाशक जैसे- इमिडाक्लोप्रिड या थायमिथोक्साम का छिड़काव फसल में उपयोगी साबित हो सकता है. छिड़काव से पहले विशेषज्ञ से सही मात्रा और समय की सलाह अवश्य लें.

फसल चक्र अपनाने की सिफारिश
इसके अलावा उन्होंने फसल चक्र अपनाने की भी सिफारिश की. सोयाबीन के बाद अन्य फसल जैसे गेहूं या चना उगाकर खेत की मिट्टी को स्वस्थ बनाए रखना चाहिए. यह तरीका ग्रडल बीटल के विकास को रोकने में मदद करता है. साथ ही खेतों की सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. पुराने पौधे और फसल अवशेष खेत से हटाएं ताकि कीट का पनाह स्थान समाप्त हो.

फसल के सही समय पर बुवाई का महत्व
एक्सपर्ट सुनील पटेल ने यह भी बताया कि फसल का सही समय पर बोना जरूरी है. बारिश के मौसम में ज्यादा देर तक बुवाई करने से कीटों के प्रकोप का खतरा बढ़ जाता है. किसानों को मौसम पूर्वानुमान का ध्यान रखते हुए फसल की बुवाई करनी चाहिए ताकि फसल विकास के अनुकूल माहौल बना रहे और कीटों का प्रकोप न हो.

किसानों के लिए संदेश
उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे हर तरह की अफवाह से बचें और कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से प्रमाणित जानकारी लेकर ही उपचार करें. फसल की सही देखभाल, समय पर निरीक्षण और विशेषज्ञ सलाह से ही हम ग्रडल बीटल के खतरे से बच सकते हैं. खंडवा जिले के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इन उपायों को अपनाकर वे इस खतरनाक बीमारी से अपनी फसल को बचा सकेंगे और अच्छा उत्पादन हासिल करेंगे. समय रहते सही कदम उठाकर ही किसान इस संकट से पार पा सकते हैं. यदि अभी बचाव किया गया, तो आने वाले समय में फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.

तभी बीमारी से सुरक्षित होगा खेत
सोयाबीन की फसल पर ग्रडल बीटल का हमला गंभीर समस्या बन चुका है लेकिन समय पर सही जानकारी और उपाय से इससे निपटा जा सकता है. किसानों को चाहिए कि वे कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें, प्रमाणित कीटनाशक का छिड़काव करें और खेत की नियमित सफाई का ध्यान रखें. तभी वे इस बीमारी से अपने खेत को सुरक्षित कर सकते हैं और फसल का बेहतर उत्पादन सुनिश्चित कर सकेंगे.



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