मंडला में पिछले एक हफ्ते में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। तीन लोगों ने तो दो दिन में दम तोड़ा। उन्हें उल्टी–दस्त हुए थे। मरने वाले दो भाई और उसकी मां हैं। अचानक हुई इन मौतों से एक तरफ गांव में खौफ है। दूसरी तरफ परिवार भी दहशत में है।
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मामला सामने आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर घुघरी के कोना टोला गांव पहुंची।
चार सदस्यों की मौत के बाद परिवार में मातम है।
लोगों की आंखों में आंसू और खौफ
मंडला से करीब 55 किमी दूर आदिवासियों का कोना टोला गांव। चारों ओर हरियाली से ढंकी पहाड़ियां। देखने में किसी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता। 20-21 मकान और आबादी सौ-सवा सौ के करीब। पूरा गांव की आपस में रिश्तेदारी भी है।
लेकिन, पिछले दो दिन में एक ही परिवार में हुई चार लोगों की मौत के बाद गांव में सन्नाटा है। महिलाएं हो या पुरुष किसी की आंख में आंसू नहीं एक अजीब तरह का खौफ है।
भले ही मौत की वजह दूषित पानी से हुए डायरिया को बताया जा रहा है, लेकिन आदिवासियों के खौफ की वजह कुछ-कुछ समझ आती है। कारण– 8 सिंतबर को जिस 18 महीने के मासूम की मौत हुई, उसे उल्टी-दस्त नहीं हुए थे। उसे मौत से दो घंटे पहले झटके आए थे। वहीं, एक परिवार के दो भाई अलग-अलग रहते थे। दोनों ही अलग-अलग कुएं का पानी पीते थे।
दैनिक भास्कर की टीम गांव पहुंची। गांव के लोग हैरानी से देख रहे थे। हम गांव के हालात समझ ही रहे थे कि एक-एक कर तीन कार और चार एम्बुलेंस सायरन बजाती आ गईं। इनमें चार डॉक्टर, पीएसई के अधिकारी और 15-20 हेल्थ वर्कर थे। हेल्थ वर्कर और डॉक्टरों ने अपना काम शुरू किया और हमने अपना।
सबसे पहले सरपंच पति शिवकुमार मिले। वह कहते हैं कि मरने वाले सब मेरे परिवार के ही सदस्य हैं। इसकी शुरुआत 8 सितंबर से हुई। 16 महीने के आदित्य केराम की अचानक मौत हो गई। दोपहर 3 बजे के करीब उसे झटके आए। शाम 5 बजे घर में ही मौत हो गई। 13 सितंबर को मुन्ना केराम (48) और उसकी मां नरबदिया केराम (68) की मौत हो गई। 14 सितंबर को मुन्ना के छोटे भाई देव सिंह केराम ने भी दम तोड़ दिया।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुएं के पानी के सैंपल लिए हैं।
मृतक की बेटी बोला- बड़े पापा तो दूसरे कुएं का पानी पीते थे
मृतक देव सिंह के घर के पास ही कुएं पर एक लड़की कपड़े धो रही थी। पूछने पर उसने बताया कि वह देव सिंह की बेटी राजेश्वरी केराम है। वह सेमरखापा स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय में 11वीं पढ़ती है। पिता की मौत की खबर पर घर आई है। परिवार और गांव के अन्य सदस्य पिता के अंतिम संस्कार के लिए गए थे।
राजेश्वरी कहती हैं कि पहले मेरे बड़े पापा मुन्ना लाल केराम और दादी नरबदिया और फिर पिता देव सिंह मर गए। अब भाई पूरन सिंह और बड़ी मां रामकी भी बीमार हैं। उसने बताया कि हम इसी कुएं का पानी पीते हैं। बड़े पापा का घर यहां से करीब 100 मीटर दूर है, वो दूसरे कुएं के पानी का उपयोग करते हैं।

दोनों भाई के परिवार अलग-अलग कुएं का पानी पीते थे।
पथरा सी गई बच्चे की मां की आंखें
हम लोगों से बात ही कर रहे थे कि एक शख्स ने बताया कि वो देखिए वो हैं, आदित्य की मां अनुसुइया। 18 महीने के आदित्य की 8 सितंबर को सबसे पहले मौत हुई थी। हम अनुसुइया के पास पहुंचे। बदहवास सी स्थिति में हैं। हमने रास्ते में उन्हें रोका। मृतक मुन्ना और देव सिंह इनके मामा थे। नरबदिया बाई नानी। दूध पीते बच्चे और परिवार के तीन और लोगों के मौत ने जैसे हाेंठ सिल से दिए हैं। हमने पूछा क्या हुआ आदित्य को, तो कुछ बोली ही नहीं। फिर से पूछा तो कंपकंपाते होठों से बोली- मैं तो जंगल गई थी। उसे माई के पास छोड़कर गई थी। ये तो रोज का काम था। 3 बजे के करीब उसकी तबीयत खराब हुई थी। उसे अचानक झटका आया। इतने में ही तेज बारिश होने लगी। मां उसे अस्पताल नहीं ले जा पाई। बारिश बंद होने का इंतजार कर रहे थे। शाम 5 बजे वो हमें छोड़कर चला गया। जैसा अब बता रहे हैं कि सब उल्टी-दस्त से मर गए। लेकिन, आदित्य को तो उल्टी-दस्त नहीं हुए। आदित्य को उस दिन से पहले कभी झटका नहीं आया था।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव के लोगों की जांच की।
घर-घर दस्तक दे रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
डॉक्टर घरों में जाकर लोगों का चेकअप कर रहे थे, तो दूसरे हेल्थ वर्कर ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने और क्लोरीन की गोलियां बांट रही थी। रास्ते में बीएमओ डॉ. नीरज राज मिले। उन्होंने बताया, उल्टी-दस्त से तीन लोगों की मौत हुई है। बच्चे की मौत की वजह दूसरी है। जो लोग बीमार हैं, उनकी जांच और ब्लड सैंपल लिए गए हैं। एएनएम, सीएचओ की एक सप्ताह की ड्यूटी लगाई गई है, जिससे सर्वे किया जा सके।
उन्होंने कहा- डायरिया में आम तौर पर दस्त या उल्टी बहुत होती है। यहां पीड़ित परिवार वालों ने बताया है कि जिन लोगों की मौत हुई है, उनको एक या दो बार ही दस्त होने की जानकारी मिली है। साथ ही, बुखार, बदन दर्द, पेट दर्द, कमजोरी की शिकायत थी। ऐसा डायरिया में कम ही होता है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री एके जोशी ने कहा प्राथमिक तौर पर यह डायरिया नहीं लग रहा है। ये बीमारी की वजह से कुछ हुआ हो सकता है। वहीं, एसडीएम हुनेन्द्र घोरमारे ने बताया कि गांव में ऐसी बीमारी नहीं दिख रही है सिर्फ यही परिवार बीमार है। यहां क्लोरीनेशन किया जा रहा है, पानी उबाल कर पीने के लिए कहा जा रहा है बाकी स्थिति सामान्य है।