एम्स भोपाल ने मेलीओडोसिस नामक गंभीर संक्रामक रोग को लेकर मंगलवार को रिपोर्ट जारी की है। जिसमें कहा गया है कि मध्यप्रदेश में अब तक 130 से ज्यादा मरीज मेलीओडोसिस नामक संक्रमण से ग्रसित पाए गए हैं। यह बैक्टीरिया जनित रोग इतना खतरनाक है कि यदि समय पर सही
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एम्स भोपाल
20 जिलों में आ चुके हैं केस एम्स ने रिपोर्ट में बताया कि पिछले 6 सालों में मध्यप्रदेश के 20 से अधिक जिलों से 130 से ज्यादा मेलीओडोसिस के मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि यह बीमारी अब प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) रूप ले चुकी है। संस्थान ने डॉक्टरों और आम जनता दोनों से अपील की है कि लंबे समय तक ठीक न होने वाले बुखार और टीबी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें।

14 नए केस आए सामने एम्स भोपाल ने 2023 से अब तक चार विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए हैं, जिनमें 25 से अधिक सरकारी व निजी संस्थानों के 50+ माइक्रोबायोलॉजिस्ट और चिकित्सक प्रशिक्षित किए गए। इनकी बदौलत हाल ही में 14 नए केस अलग-अलग संस्थानों (जीएमसी भोपाल, बीएमएचआरसी, जेके हॉस्पिटल, सागर व इंदौर) से रिपोर्ट किए गए। यह इस बात का सबूत है कि जागरूकता और लैब क्षमता बढ़ने से पहचान भी तेजी से हो रही है।
WHO- उभरती हुई उपेक्षित बीमारियों की सूची में शामिल मेलीओडोसिस दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। अब भारत के कई राज्यों, खासकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में इसके बढ़ते केस चिंता का विषय हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसे उभरती हुई उपेक्षित बीमारियों की सूची में शामिल किया है।
एम्स की सलाह… यदि किसी को 2–3 हफ्तों से अधिक बुखार है, एंटी-टीबी दवा से कोई फायदा नहीं हो रहा या बार-बार फोड़े बन रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से मेलीओडोसिस की जांच करवाएँ। यही सावधानी जीवन बचा सकती है।