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Rana Hanuman Singh Story: एमपी के बालाघाट जिले के दानवीर कहे जाने वाले राणा हनुमान सिंह बहुत ही खास शख्सियत थी. उन्होंने जिले के विकास को लेकर कई काम करने के साथ-साथ अपनी सैकड़ों एकड़ जमीन दान कर दी. जानिए क्यों थे इतने खास.
जानिए कौन थे राणा हनुमान सिंह?
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बड़गांव में राणा हनुमान सिंह का जन्म हुआ था. उनका जन्म 14 सितंबर 1907 को हुआ था. वहीं, उनके परिवार की गांव में जमींदारी हुआ करती थी. उन्होंने गांव की ही पाठशाला से शिक्षा हासिल की और उस समय आजादी की आंदोलनों में भी शामिल हुआ करते थे. उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे खास काम किए, जिसकी वजह से उन्होंने दानवीर कहा जाता है. कृषि के क्षेत्र में दिए योगदान की वजह से उन्हें बालाघाट के चौधरी चरण सिंह के नाम से भी जाना जाता था.
राणा हनुमान सिंह दूरदर्शी सोच के व्यक्ति थे. उन्हें बालाघाट की खेती को उन्नत बनाने के लिए वैज्ञानिक और आधुनिकता की जरूरत महसूस हुई. ऐसे में उन्होंने इसके लिए अनेकों प्रयास किए. उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के लिए अपने निवास स्थान यानी घर समेत कृषि विज्ञान केंद्र के लिए 78 एकड़ जमीन दान कर दी थी. इसके अलावा शिक्षा के लिए भी उन्होंने कई काम किए हैं. जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट सरस्वार ने लोकल18 को बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र को 78 एकड़ जमीन, बड़गांव के राम मंदिर के लिए 42 एकड़ जमीन दान की. तिरोड़ी में 20 मत्स्य चेतना केंद्र के लिए दान कर दी. तिरोड़ी में एक ट्रस्ट का निर्माण करवाया गया. उन्होंने स्कूल और कॉलेजों के लिए भी जमीन दान कर दी. उन्होंने कूल 150 एकड़ से ज्यादा जमीन जिले के विकास और जनहित में दान कर दी.
जिले के बाहर भी मशहूर थी ख्याति
जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट सरस्वार ने इसके अलावा जिले के बाहर नागपुर में महाराणा प्रताप स्मृति संस्था भी स्थापित करवाई थी. विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स के भी अध्यक्ष रहे. ऐसे में बालाघाट जिले से लेकर महाराष्ट्र के नागपुर तक उनकी ख्याति थी. उन्होंने शिक्षा, कृषि और माइनिंग के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है.
अनूप सिंह बैस राणा हनुमान सिंह के बारे में कहा जाता है कि उनके घर अगर कोई मदद मांगने आता था, तो कोई निराश होकर नहीं लौटता था. वह हमेशा जनहित के कार्यों में आगे रहते थे. विकास कार्यों के लिए हमेशा संघर्ष करते थे. आज के युवाओं को अगर उनसे कुछ सीखना हो तो निष्ठा और समाज सेवा का जुनून सीखना चाहिए.
लाइम स्टोन की खोज के लिए बैलगाड़ी से निकले
जितेंद्र सिंह चौहान बताते है कि डोलोमाइट और लाइम स्टोन की खोज के लिए भी उन्हें याद किया जाता है. वह बैलगाड़ी से जाते थे. वह मंडला तक जाते थे. वहीं, बालाघाट के ठाकुर टोला, भगतपुर और दुगलई में लाइम स्टोन की खोज की. वहीं, तिरोड़ी सहित कुछ इलाकों मैंगनीज की भी खोज की थी. उनकी इन्हीं खोज के कारण जिले में सीमेंट फैक्ट्री और मार्बल फैक्ट्री खुली थी, लेकिन सरकारी नीतियों के कारण उद्योग बंद होते चले गए. उनके जन्म जयंती के मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव पर कई तरह के कार्यक्रम हुए. इस दौरान पशुओं का टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवा शिविर का भी आयोजन हुआ. इस दौरान कार्यक्रम में 500 से ज्यादा लोग उपस्थित रहे.
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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