अपने माता-पिता व भाई के साथ सुरुचि फोगाट।
हरियाणा के झज्जर जिले के छोटे से गांव सासरौली में फौजी के घर जन्मी सुरुचि फोगाट ने शूटिंग में नंबर वन रैंकिंग हासिल कर ली है। सुरुचि रेसलर बनना चाहती थी और अखाड़े में भी उतर गई थी। एक मैच के दौरान जब वह कुश्ती लड़ रही थी तो उसकी गले की हड्डी (हसली टू
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सुरुचि को स्पोर्ट्स की दुनिया में भेजने का मन उसके पिता इन्द्र फोगाट ने बनाया था। इंद्र फोगाट ने बताया कि उसका सपना था स्पोर्ट्स से बड़े मुकाम तक जाने का लेकिन उस समय घर के हालात गरीबी के थे तो वह स्पोर्ट्स में नहीं जा पाया।
शूटिंग करती झज्जर की सुरुचि फोगाट।
बेटी के जन्म पर लिया खिलाड़ी बनाने का संकल्प
उसके बाद इन्द्र फोगाट ने बताया कि उसकी आर्मी में नौकरी लग गई तो घर की ओर ध्यान हो गया। शादी होने के बाद और भी जिम्मेदारी बढ़ गई और अच्छा खिलाड़ी बनने का उसका सपना वहीं पर दफन करना पड़ा। शादी के बाद बेटी सुरुचि का घर में जन्म हुआ तब मन में ठान लिया कि वह तो स्पोर्ट्स में नहीं जा पाया, अब बेटी को बड़ा खिलाड़ी बनाऊंगा और अपना सपना पूरा होगा।

शूटिंग की प्रैक्टिस के दौरान सुरुचि का फोटो।
कुश्ती के दौरान टूट गई थी गले की हड्डी
इन्द्र फोगाट ने बताया कि जब सुरुचि का जन्म हुआ तब कुछ दिन पहले ही डेप्थ ओलिंपिक में गांव के वीरेंद्र उर्फ गूंगा पहलवान गोल्ड मेडल जीतकर लौटे थे। तभी मन में ठान लिया कि बेटी को अच्छी पहलवान बनाना है। उन्होंने बताया कि वह 2019 में आर्मी से हवलदार से रिटायर हुआ था। उस समय बेटी 12 साल की थी और आते ही बेटी सुरुचि को पहलवानी के गांव के ही अखाड़े में ले जाने लगा। बेटी को पहलवानी करते 5 महीने ही गुजरे थे कि एक कुश्ती ने उन्हें झकझोर दिया।

गोल्ड मेडल दिखाती सुरुचि फोगाट।
13 साल की उम्र में शुरू की शूटिंग
गांव में ही अखाड़े में कुश्ती हो रही थी बेटी के जीतने की टकटकी लगाए देख रहा था। उस दौरान बेटी की गले की हड्डी टूट गई और सब स्तब्ध रह गए। फिर करीब 6 माह में सुरुचि की हड्डी जुड़ी लेकिन उसे दोबारा डर के मारे अखाड़े में नहीं उतारा। फिर कुछ समय बाद सुरुचि को स्पोर्ट्स में भेजने का मन में आया और 13 साल की उम्र में उसे शूटिंग करने भेजना शुरू किया। सुरुचि शूटिंग में रुचि लेने लगी और मन लगाकर शूटिंग करने लगी थी।

जीत के बाद मेडल दिखाती सुरुचि फोगाट।
6 साल में ही बनी दुनिया की नंबर एक शूटर
सुरुचि ने बताया कि उसके पिता का सपना था कि वह एक अच्छी पर्सन बने और देश दुनिया के नाम हो, उनकी इच्छा पूरी करने के लिए पूरा मन लगाकर शूटिंग किया और दो साल में मेहनत रंग लाई और नैशनल में मेडल जीता। वहीं सुरुचि फोगाट ने बताया कि 2019 में उसने शूटिंग शुरू की थी और आज 6 साल में माता पिता के आशीर्वाद से वह देश और दुनिया में नंबर एक शूटर बन गई है। सुरुचि ने कहा कि उसके माता पिता का जो सपना है उसे पूरा करने के लिए वह जी जान से शूटिंग करती है और आगे भी तैयारी करती रहेगी।

शूटिंग प्रैक्टिस के दौरान का सुरुचि फोगाट का फोटो।
छोटा भाई भी शूटिंग कर रहा
सुरुचि की मां सुदेश देवी हाउस वाइफ है और वह घर पर ही रहती हैं। वहीं सुरुचि का एक छोटा भाई है वह भी शूटिंग करता है। सुरुचि फोगाट ने भिवानी के गुरू द्रोणाचार्य अकादमी से शूटिंग करना शुरू किया था। सुरुचि के कोच सुरेश सिंह हैं।

सुरुचि फोगाट का एयरपोर्ट का फोटो।
माता-पिता का सपना ओलिंपिक में मेडल जीते
सुरुचि की मां सुदेश देवी ने बताया कि वह उसकी बेहद लाडली बेटी है वह हमेशा उसकी बेटी के लिए दुआएं करती रहती है। वहीं सुदेश देवी ने कहा कि उनकी इच्छा है कि वह ओलिंपिक में मेडल जीतकर देश का नाम दुनिया में रौशन करे। वहीं सुरुचि ने कहा कि माता पिता का हर सपना पूरा करने के लिए वह मेहनत करेगी और मुकाम हासिल करेगी।

सुरुचि फोगाट जीत के बाद तिरंगा लहराते हुए।
सुरुचि फोगाट की अंतर राष्ट्रीय उपलब्धियां
1. जूनियर वर्ल्ड कप जर्मनी 2023 – 1 सिल्वर, 1 ब्रोंज मेडल
2. एशिया शूटिंग चैंपियनशिप साउथ कोरिया, 2023 – सिल्वर मेडल
3. ISSF वर्ल्ड कप अर्जेंटीना अप्रैल 2025 – सिंगल गोल्ड मेडल, टीम ब्रोंज मेडल
4. ISSF वर्ल्ड कप पेरू 2025 – दो गोल्ड मेडल
5. ISSF वर्ल्ड कप जर्मनी 2025 – गोल्ड मेडल
6. शूटिंग एशियन चैंपियनशिप 2025 – 2 ब्रोंज मेडल