रतलाम में प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी से लूट की वारदात में शामिल तीन आरोपियों को कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 5-5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
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यह फैसला भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत लूट और संगठित अपराध की धाराओं में सुनाया गया। मामले की सुनवाई प्रधान सत्र न्यायाधीश नीना आशापुरे की अदालत में हुई।
कलेक्शन के दौरान हुई थी लूट
सरकारी वकील सुरेश कुमार वर्मा ने बताया कि फरियादी सुभाष गामड़, निवासी रतलाम, एसएमएफजी (सुमिटोमो मित्सुई फाइनेंशियल ग्रुप) कंपनी में काम करते हैं और महिला समूह लोन की किश्तें जमा करने का कार्य करते हैं। 21 अक्टूबर 2024 को उन्होंने 11 महिलाओं से कुल 27,370 रुपए की राशि एकत्र की थी। इसके बाद वे सातरुंडा चौराहे की ओर कलेक्शन के लिए रवाना हुए।
रास्ते में टायर फैक्ट्री के सामने रोड पर तीन अज्ञात युवकों ने उनकी बाइक रोक ली। चाबी निकालकर पहले मारपीट की और फिर रुपए से भरा बैग व मोबाइल फोन छीनकर फरार हो गए। बैग में नकदी के अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज भी रखे थे।
पुलिस ने एक साल में किया फैसला सुनिश्चित
घटना के बाद सुभाष ने तुरंत अपने साथियों और ऑफिस को सूचना दी और फिर बिलपांक थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS 2023 की धारा 3(5) और धारा 309 के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लूटे गए रुपए, बैग और बाइक को भी बरामद कर लिया गया। बाद में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(6), 111(3) और 111(5) के अंतर्गत चालान कोर्ट में पेश किया।
ये हैं दोषी आरोपी
- लखन (22) पिता प्रहलाद चौहान, निवासी ग्राम छनगारा, थाना कानवन, जिला धार
- लालचंद उर्फ लाला (26) पिता जगदीश परमार, निवासी ग्राम छोटा कठोड़िया, थाना बदनावर, जिला धार
- महिपाल (23) पिता गोकुलसिंह सोलंकी, निवासी ग्राम रिटोड़ा, थाना कानवन, जिला धार
तीनों को कोर्ट ने दोषी पाते हुए 10-10 साल की कठोर सजा और 5-5 लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। इस मामले में अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुरेश कुमार वर्मा ने प्रभावी पैरवी की, जिससे एक साल के भीतर ही न्याय सुनिश्चित हो सका।