मप्र पुलिस की टेलीकॉम शाखा जल्द ही थर्मल इमेज और इंफ्रारेड ड्रोन कैमरों की खरीदी करने जा रही है। पहले चरण में इस तरह के ड्रोन कैमरे उन जिलों को अलॉट किए जाएंगे, जहां नक्सल मूवमेंट हैं। थर्मल इमेज तकनीक से लैस कैमरों की मदद से घने जंगलों में हो रहे नक
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इसके बाद मप्र पुलिस ने ड्रोन खरीदने की कवायद शुरू कर दी हैं। इनमें नक्सल मूवमेंट वाले जिलों में ड्रोन की अलग तरह से मदद लेंगे, जबकि अन्य जिलों में इसका इस्तेमाल कानून व्यवस्था संभालने में किया जाएगा। एडीजी टेलीकॉम संजीव शमी ने बताया कि इस प्रपोजल के जरिए मप्र के हर जिले को एक-एक ड्रोन दिए जाएंगे। हाइटेक तकनीक से लैस इन ड्रोन्स में बेयॉन्ड विजुअल लाइन ऑफ साइट (बीवीएलओएस) तकनीक भी होगी।
यानी ये ड्रोन रिमोट फ्लाइंग भी कर सकेंगे। अब तक ड्रोन को मैनुअली उड़ाया जाता रहा है। अब आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कमांड देते ही ड्रोन की मदद से किसी वाहन या गिरोह का लंबी दूरी तक पीछा भी किया जा सकेगा। सूत्रों का कहना है कि इस तरह के हाईटेक ड्रोन उड़ाने के लिए दक्ष पुलिसकर्मियों की भी जरूरत पड़ेगी।
ऐसे काम करेगा ड्रोन
- दिन हो या रात, ये कैमरे तपिश को कैप्चर करेंगे। यानी यदि मूवमेंट के दौरान नक्सलियों ने कोई डेरा जमाकर खाना बनाया है तो उनके चूल्हे और शरीर की तपिश को भी ये कैमरे पकड़ लेंगे।
- इस तकनीक से लंबी दूरी तक किसी वाहन या समूह का पीछा संभव होगा।
- ड्रोन की मदद से किसी भी अपराधी के मूवमेंट की लाइव फीड, पुलिस मुख्यालय में बैठी ग्राउंड टीम को मिलती रहेगी। लाइव फीड देखकर ग्राउंड टीम, फील्ड में ऑपरेशन कर रही टीम को अपडेट जानकारी देती रहेगी।