राजधानी में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल-बेहाल: गार्ड कर रहा एक्सरे… वार्ड बॉय बांट रहे दवाइयां; नर्सें बनीं क्लर्क – Bhopal News

राजधानी में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल-बेहाल:  गार्ड कर रहा एक्सरे… वार्ड बॉय बांट रहे दवाइयां; नर्सें बनीं क्लर्क – Bhopal News



शहर में 6 गैस राहत अस्पतालों में व्यवस्था-बदहाल…

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रेडियोग्राफर पदस्थ है पर ड्यूटी पर नहीं, सफाईकर्मी संभाल रहे हैं मुख्य भंडार का काम

यह तस्वीर राजधानी के डीआईजी बंगला स्थित जवाहरलाल नेहरू गैस राहत अस्पताल में सुबह 9:44 बजे की है। यहां एक्स-रे का काम डॉक्टर या टेक्नीशियन नहीं, बल्कि सिक्योरिटी गार्ड कर रहा है। यह न सिर्फ मेडिकल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों की जिंदगी से भी खिलवाड़ है। शहर में 6 गैस राहत अस्पताल और 9 डिस्पेंसरी हैं। लापरवाही का आलम करीब-करीब सभी जगह है।

जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में एक्स-रे टेक्नीशियन की कमी है। अब गार्ड ही मरीजों को कमरे में भेजता है, मशीन ऑन करता है और एक्स-रे करता है। एक्स-रे रिपोर्टिंग का काम डॉक्टर के पास जाता है। एक्स-रे मशीन से निकलने वाली रेडिएशन की सही डोज तय करना जरूरी होता है।

गलत सेटिंग मरीज के शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए गलत तरीके से किया गया एक्स-रे गंभीर खतरा बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक्स-रे कराने के लिए सरकार से मान्यता प्राप्त रेडियोग्राफर या टेक्नीशियन ही अधिकृत होते हैं। किसी गार्ड या अन्य स्टाफ को यह काम कराना सीधी लापरवाही है। बता दें कि यहां एक रेडियोग्राफर भी पदस्थ है, लेकिन अवकाश पर है।

गैस राहत विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में मेल नर्स बृजेश मीना और सफाईकर्मी दीपक शर्मा को मुख्य भंडार का काम सौंप दिया गया है। फार्मासिस्ट मेघा पदस्थ हैं लेकिन ड्यूटी पर नहीं आतीं। यही नहीं, जावक शाखा में आया बैठी है, तो लेखा शाखा में दो साल से सेवानिवृत्त अब्दुल रफीक को रोगी कल्याण समिति से पदस्थ कर रखा है। आलम यह है कि नर्स-फार्मासिस्ट बाबूगिरी कर रहे हैं और वार्डबॉय दवाईयां बांट रहे हैं।

सीएमएचओ बोले– कभी गार्ड भी कर देता है एक्स-रे

कहां क्या-क्या खामियां… 1. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, गैस राहत, बैरसिया रोड: मेल नर्स बृजेश मीना और सफाईकर्मी दीपक शर्मा मुख्य भंडार का कार्य कर रहे हैं। फार्मासिस्ट मेघा नाम मात्र पदस्थ हैं, वास्तविक जिम्मेदारी पूरी नहीं निभा रहीं। 2. शाकिर अली खान चिकित्सालय: यहां भूरे लाल वार्डबॉय दवाई वितरण कर रहे हैं। महिला लैब टेक्नीशियन वर्षों से ईसीजी देख रही हैं। इलेक्ट्रीशियन छोटे राम अहिरवार लैब रिपोर्ट बांट रहे हैं। डार्करूम असिस्टेंट बीपी नाप रहे हैं। 3. बैरसिया रोड अस्पताल: यहां महिला लैब टेक्नीशियन ईसीजी कर रही हैं। इलेक्ट्रीशियन छोटे राम अहिरवार लैब रिपोर्ट बांट रहे हैं। डार्करूम असिस्टेंट बीपी नाप रहे हैं, दूसरा असिस्टेंट ड्रेसिंग और आयुष्मान कार्ड बना रहा है। 4. जहांगीराबाद पल्मोनरी मेडिसिन सेंटर: यहां कम्पाउंडर सत्येंद्र सिंह सिर्फ बीपी नाप रहे हैं। रेडियोग्राफर शिवदीप मिश्रा कैंसर और किडनी मरीजों का इलाज देखने के साथ-साथ रोगी कल्याण समिति की फाइलों का कार्य संभाल रहे हैं। 5. शाहजहांनाबाद मास्टर लाल सिंह अस्पताल: वार्डबॉय आरिफ खान 30 साल से बाबूगिरी कर रहे हैं। धनपत पटेल, दीपक कटारिया, शेख परवेश और विजेंद्र परमार दवाई बांटने, ड्रेसिंग में लगे हैं। बरखेड़ी डिस्पेंसरी में नर्स लुईस स्टोर देख रही हैं। 6. कमला नेहरू सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल: यहां नर्स रश्मि स्थापना शाखा संभाल रही हैं। वार्डबॉय हर्ष चौरसिया और विकास खंडारे लिपिक सहायक बन गए हैं। ड्रेसर जितेंद्र खत्री मुख्य भंडार चला रहे हैं। पैथोलॉजी में इमरजेंसी ड्यूटी तय नहीं। 7. डिस्पेंसरी: पुतलीघर, करोंद और कबाड़खाना की डिस्पेंसरी में वार्डबॉय और लैब अटेंडेंट दवा बांट रहे हैं। करोंद में राजकुमार वार्डबॉय और कबारखाना में नितिन मरमट लैब अटेंडेंट को जिम्मेदारी दी गई है।

मूल काम छोड़कर दूसरा संभाल रहे गैस त्रासदी के पीड़ितों को बेहतर इलाज और सुविधा देने के लिए बनाए गए अस्पताल और डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं। जमीनी हकीकत यह है कि यहां कर्मचारी अपने मूल काम को छोड़कर दूसरे विभागों का बोझ ढो रहे हैं। गैस त्रासदी के बाद सरकार ने इन अस्पतालों को पीड़ितों के लिए विशेष इलाज और समुचित सुविधाएं देने के उद्देश्य से शुरू किया था।

लोकल डॉक्टर्स क्या काम करा रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं हो सकता है कभी कोई गार्ड एक्स-रे कर रहा होगा। लोकल डॉक्टर्स स्टाफ से क्या काम करा रहे हैं, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। -डॉ. सत्येंद्र एस राजपूत, सीएमएचओ, गैस राहत विभाग (उनसे अन्य अस्पतालों की बात पूछी तो सोमवार को बात करने का कहते हुए मामले को टाल दिया।)



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