इकोकार्डियोग्राफी दिल की हर धड़कन, हर हलचल और हर गड़बड़ी को साफ-साफ दिखा देती है। इसी तकनीक पर होटल रेडिसन में इकोकार्डियोग्राफी पर 15वीं नेशनल वर्कशॉप रखी गई। जिसमें बेंगलुरु से वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी विजयालक्षमी शामिल हुईं। उन्होंने बताय
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डॉ. आईबी विजयालक्षमी ने कहा कि बढ़ते ह्रदय रोग के खतरे को देखते हुए इन मॉडर्न तकनीक की पहुंच हर मरीज तक पहुंचनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि अधिक मेडिकल स्टूडेंट्स और नए विशेषज्ञों को इन्हें सीखना चाहिए। जिससे मरीजों के हृदय रोग का सटीक निदान करने में मदद मिले।
डॉक्टर का सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार जरूरी डॉ. विजयालक्षमी ने कहा, मरीजों का इलाज करते समय डॉक्टरों को सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाना चाहिए। यह बेहद जरूरी है। इससे डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसा बढ़ता है। जिससे सफल उपचार में मदद मिलती है।
इकोकार्डियोग्राफी का सबसे अधिक उपयोग आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. पीएस मनीरिया ने बताया कि इमेजिंग टेक्नोलॉजी में इकोकार्डियोग्राफी का सबसे अधिक उपयोग किया जा रहा है। इसे हृदय रोग विशेषज्ञों की तीसरी आंख कहा जाता है, क्योंकि इसके जरिए दिल की संरचना और बीमारियों की गहराई तक झांका जा सकता है। इसकी पहुंच दूरदराज के इलाकों तक भी बढ़ रही है। समय रहते सही जानकारी मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
इकोकार्डियोग्राफी क्यों जरूरी?
- दिल की बीमारियों की शुरुआती पहचान संभव
- बिना दर्द और सर्जरी के जांच
- इलाज की दिशा तय करने में सहायक
हृदय रोगों में फायदे
- हृदय की संरचना और कार्यप्रणाली की स्पष्ट तस्वीर
- ब्लॉकेज और वाल्व संबंधी समस्याओं की पहचान