किसान ने सोने से महंगी लकड़ी पर लगाया दांव, 90000 में मंगाए 140 पौधे, कुछ सालों में करोड़ों की कमाई! जानें खेती

किसान ने सोने से महंगी लकड़ी पर लगाया दांव, 90000 में मंगाए 140 पौधे, कुछ सालों में करोड़ों की कमाई! जानें खेती


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Agriculture Tips: मध्य प्रदेश सागर के एक किसान ने दुनिया की सबसे महंगी लकड़ी की खेती की ठानी है. दावा किया कि इसकी खेती से कुछ सालों में करोड़पति बन जाएंगे…

Sagar News: सागर में 65 साल के किसान शोभाराम पटेल जिस पेड़ की खेती कर रहे हैं, अगले कुछ सालों में वो उनको करोड़पति बनाने वाला है. किसान घर बैठने की उम्र में खेती में नया प्रयोग कर रहे हैं. यूं तो किसान शोभाराम ने 4-5 साल में कई प्रयोग किए और सफल भी हुए. लेकिन, इस बार उन्होंने विश्व की सबसे महंगी लकड़ी कहे जाने वाली अगरवुड पर दाव खेला है. इस पेड़ की लकड़ी सोने के जैसी महंगी है. किसान ने गुजरात से इन पौधों को ऑर्डर पर मंगवाया है.

किसान शोभाराम ने बताया, मैंने तो 200 पौधे का ऑर्डर दिया था, लेकिन 140 पौधे ही मिल पाए हैं. सागर से करीब 40 किलोमीटर दूर टेहरा टेहरी गांव के शोभाराम पटेल ने 90,000 के 140 पौधे मंगवाए हैं. ऐसे में एक पौधे की कीमत 600 रुपये के करीब पड़ी. ये पौधा 8 से 10 साल की मेहनत के बाद पेड़ बनकर तैयार होगा. एक परिपक्व पेड़ की कीमत दो से चार लाख बताई जाती है. इस पेड़ की लकड़ी से इत्र बनता है. पेड़ की लकड़ी के अंदर जो सार होता है, वह किलो के हिसाब से खरीदा जाता है.

खेत में अगरवुड कैसे उगाएं?
शोभाराम पटेल बताते है, घर बैठने से अच्छा है कि कुछ करते रहें. पिछले साल अश्वगंधा की खेती की थी, जिसमें अच्छा मुनाफा हुआ था. इसी मुनाफे के पैसे से हमने अपने खेत में 18 महीने वाली फसल सर्पगंधा लगाई. वहीं, अब अगरवुड को भी तैयार कर रहे हैं. इसे लगाने के लिए हम अपने खेत में 20 बाय 20 की दूरी पर गड्ढे किए हैं, जिनको नीम पाउडर और चूना के साथ तैयार कर रहे हैं. पौधे लगाते समय वर्मी कंपोस्ट को मिट्टी में मिक्स करते हैं. साथ में थोड़ी बालू का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. जब तक मिट्टी में नमी है, तब तक पानी देने की आवश्यकता नहीं पड़ती.

बस, चोरों से बचाना होगा…
किसान ने बताया, अभी एक दो साल ज्यादा रखरखाव की जरूरत है. बड़े होने के बाद देखभाल की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन, इन पेड़ों को चोरों से बचाना बहुत जरूरी है. जानकारी के अनुसार, अगरवुड पेड़ को देवताओं का पेड़ भी कहा जाता है, यह सालों साल में तैयार हो पाता है. अधिकतर किसान इन्हें खेत की मेड़ पर या फिर इस तरह से खेत में लगाते हैं कि उसके साथ दूसरी फसलें बिना किसी डिस्टरबेंस आसानी से उगाती रहें.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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गुजरात से 90000 में मंगाए 140 पौधे, कुछ सालों में ये किसान बनेगा करोड़पति!



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