Navratri: क्यों दुर्लभ है महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा? एमपी के इस शहर में हजारों साल पुराना मंदिर, जानें महिमा

Navratri: क्यों दुर्लभ है महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा? एमपी के इस शहर में हजारों साल पुराना मंदिर, जानें महिमा


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Mahishasura Mardini Temple: मध्य प्रदेश के विंध्यांचल पर्वत पर माता का अद्भुत मंदिर है. दावा किया जाता है कि यहां जैसी प्रतिमा पूरी दुनिया में कहीं और नहीं मिलेगी. जानें महिमा…

Khargone News: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की सीमा के आखिरी छोर पर ऊंचे विंध्याचल पर्वत पर देश का इकलौता विंध्यवासिनी महिषासुर मर्दिनी माता का मंदिर है. शारदीय नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है. दूर-दराज से लोग दर्शन करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहीं पर देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को आतंक से मुक्ति दिलाई थी. मंदिर को पार्वती माताजी के नाम से भी जाना जाता है और यहां स्थापित प्रतिमा दुनिया में अद्वितीय मानी जाती है.

मंदिर के पुजारी गोवर्धन शर्मा और संदीप पाटीदार बताते हैं कि हजारों साल पहले महिषासुर नामक दैत्य को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु केवल किसी बालिका के हाथों ही हो सकती है. जब उसका आतंक चरम पर था, तब देवताओं ने मां दुर्गा का आव्हान किया. माता ने बाल रूप में प्रकट होकर इसी स्थान पर महिषासुर का वध किया और यहीं विराजित हो गईं. तभी से यह धाम शक्ति साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

तीन रूपों में होते हैं देवी के दर्शन
यहां अष्टभुजा धारी माता की प्रतिमा स्थापित है, जो पूरे देश में कहीं और नहीं मिलती. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता दिनभर में तीन अलग-अलग स्वरूप धारण करती हैं. सुबह बाल रूप, दोपहर में युवा और शाम को वृद्ध रूप में दर्शन होते हैं. होलकर शासन काल में देवी अहिल्या बाई होलकर ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था. बाद में श्रद्धालुओं के सहयोग भव्य मंदिर का निर्माण हुआ.

यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है
श्रद्धालु बताते हैं कि कुछ साल पहले तक माता की सवारी शेर भी रात में मंदिर में आता था. भक्तों का विश्वास है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. खासकर देवी की कृपा से महिलाओं की सूनी गोद भरती है. मंदिर से जुड़े बिहारीलाल नागोरा बताते हैं कि नवरात्रि में 9 दिन तक विशेष पूजन और नवचंडी महायज्ञ का आयोजन होता है. नवमी के दिन यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन होता है. इस दौरान गांव-गांव से भक्त चुनरी लेकर माता को अर्पित करते हैं. रात में गरबा और भजन संध्या का आयोजन होता है.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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क्यों दुर्लभ है महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा? MP में हजारों साल पुराना मंदिर



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