गमले और मिट्टी की तैयारी
लौंग का पौधा धीरे-धीरे बढ़ने वाला पेड़ है, इसलिए गमला बड़ा और गहरा होना चाहिए. इसके लिए कम से कम 18 इंच गहराई और चौड़ाई वाला गमला चुनें. मिट्टी ऐसी होनी चाहिए, जो पानी सोख सके और साथ ही निकासी भी अच्छी हो. गमले की मिट्टी, रेत और गोबर की खाद या कम्पोस्ट को बराबर मात्रा में मिलाकर मिश्रण तैयार करें. हल्का अम्लीय से न्यूट्रल मिट्टी (pH 5.5–6.5) लौंग के लिए सबसे उपयुक्त रहती है.
लौंग के पौधे को दो तरीकों से लगाया जा सकता है, ताजे बीज से या छोटे पौधे से. बीज से पौधा उगाना थोड़ा कठिन होता है क्योंकि सूखे बीज जल्दी अंकुरित नहीं होते. यदि बीज से शुरुआत कर रहे हैं, तो इन्हें हल्के गुनगुने पानी में 24 घंटे भिगोकर बोएं. बीज को एक से डेढ़ सेंटीमीटर गहराई पर दबाएं और मिट्टी हल्की सी दबा दें. अगर पौधा नर्सरी से लाते हैं, तो ध्यान रखें कि उसकी जड़ें स्वस्थ हों और किसी तरह के कीट या रोग न लगे हों. पौधा गमले में इस तरह लगाएं कि वह न बहुत गहरा हो और न ही ऊपर निकला रहे.
रोपण के बाद देखभाल
लौंग का पौधा उष्णकटिबंधीय वातावरण पसंद करता है. इसे ऐसी जगह रखें, जहां हल्की धूप और आंशिक छाया दोनों मिलती हो. बहुत तेज धूप में पत्तियां जल सकती हैं और बहुत ज्यादा छाया में विकास धीमा हो जाएगा. तापमान 20 से 30 डिग्री सेल्सियस और वातावरण में नमी पौधे के लिए आदर्श है. गमले की मिट्टी हमेशा नमी लिए रहे लेकिन पानी भरने की स्थिति न बने. ज्यादा पानी देने से जड़ सड़ सकती है. सर्दियों में पानी थोड़ी मात्रा में दें और गर्मियों में नियमित सिंचाई करें.
लौंग का पौधा लंबे समय तक बढ़ता है, इसलिए समय-समय पर पोषण देना जरूरी है. हर दो से तीन महीने में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद या कम्पोस्ट डालें. इसके अलावा संतुलित जैविक खाद भी डाली जा सकती है. जब पौधा बड़ा होकर फूल आने की अवस्था में पहुंचे, तो फॉस्फोरस और पोटैशियम युक्त खाद ज्यादा लाभकारी रहेगी.
कीट और रोग से सुरक्षा
लौंग के पौधे पर छोटे-मोटे कीट जैसे एफिड्स या माइट्स आ सकते हैं. इसके लिए नीम का तेल या जैविक कीटनाशक छिड़काव कारगर रहता है. अगर पत्तियां पीली पड़ने लगें या जड़ों में सड़न हो तो पानी देने की मात्रा पर ध्यान दें और प्रभावित भाग को हटा दें.
लौंग के पौधे को फूल देने में चार से 10 साल तक का समय लग सकता है. यह समय गमले की देखभाल और मौसम पर निर्भर करता है. जब पौधे पर छोटे कल्ले निकलें और उनका रंग हल्का हरा से गुलाबी-लाल होने लगे, तब उन्हें तोड़ लेना चाहिए. यही कल्ले सुखाकर रसोई में मसाले के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं. इन्हें सुखाते समय सीधी धूप में न रखें बल्कि छायादार और हवादार जगह पर रखें ताकि इनका असली स्वाद और सुगंध बनी रहे.
धैर्य सबसे बड़ा उपाय
लौंग का पौधा गमले में धीरे-धीरे बढ़ता है और इसकी देखभाल में धैर्य सबसे जरूरी है. शुरुआत में केवल पत्ते और तना विकसित होंगे लेकिन जैसे-जैसे समय बीतेगा, पौधा मजबूत होता जाएगा. नियमित पानी, सही तापमान, पर्याप्त नमी और जैविक खाद इसके विकास की कुंजी है.
आसान नहीं लेकिन नामुमकिन भी नहीं
गमले में लौंग का पौधा लगाना आसान तो नहीं लेकिन नामुमकिन भी नहीं है. थोड़ी मेहनत और सही देखभाल से आप घर बैठे-बैठे लौंग की महक का आनंद ले सकते हैं और धीरे-धीरे अपने ही उगाए मसाले का इस्तेमाल भी कर पाएंगे.