पिच पर सुनील गावस्कर के बाल काटने वाले अंपायर नहीं रहे, डिकी बर्ड का निधन

पिच पर सुनील गावस्कर के बाल काटने वाले अंपायर नहीं रहे, डिकी बर्ड का निधन


 नई दिल्ली. उनके सराहे बिना खेल अधूरा सा लगता है वो इंसान जिनकी आवाज़ सिर्फ़ निर्णय नहीं लाती थी, पर गरिमा, ईमानदारी और क्रिकेट की आत्मा का अहसास भी कराती थी. डिकी बर्ड  एक नाम, एक मिसाल, एक उपदेश आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी विरासत अनंत है. उन्होंने सिर्फ़ सीमाएँ नहीं तय कीं, बल्कि आदर्श भी छोड़े. तीन वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में अंपायरिंग, भारत-इंग्लैंड के भावनात्मक मुकाबलों में न्याय के दांव-पेंचों से ऊपर उठकर.

बर्ड की मुस्कान, उनका चमकता अंदाज़, उनका शांत लेकिन अडिग फैसला  ये वो चीजें थीं जिससे खिलाड़ी, दर्शक और आलोचक सब प्रभावित होते थे. लोकप्रिय और महान अंपायर हेरोल्ड ‘डिकी’ बर्ड का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया .बर्ड ने 1973 और 1996 के बीच अपने लंबे करियर में 66 टेस्ट और 69 एकदिवसीय मैचों में अंपायरिंग की थी.

राहुल द्रविड़-सौरव का पहला टेस्ट बर्ड का आखिरी 

अंपायर के तौर पर बर्ड का आखिरी टेस्ट 1996 में लॉर्ड्स में भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया था. इसी मैच में पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली ने टेस्ट प्रारूप में पदार्पण किया था. यॉर्कशर काउंटी क्लब ने यहां जारी बयान में कहा, ‘‘यॉर्कशर काउंटी क्रिकेट क्लब को बड़े दुख के साथ यह घोषणा करनी पड़ रही है कि क्रिकेट के सबसे चहेते लोगों में से एक हेरोल्ड डेनिस ‘डिकी’ बर्ड एमबीई ओबीई का 92 वर्ष की आयु में अपने घर पर निधन हो गया. उन्होंने कहा, ‘‘ वह अपने पीछे खेल भावना, विनम्रता और खुशी की विरासत के साथ कई पीढ़ियों के प्रशंसकों की एक फौज छोड़ गये हैं.

यॉर्कशायर से प्यार 

बर्ड का यॉर्कशर के साथ लंबे समय तक जुड़ाव रहा.  उन्होंने 1956 में इस काउंटी के साथ अपने प्रथम श्रेणी करियर की शुरुआत की और 1964 में करियर समाप्त होने तक 93 मैचों में 3,314 रन बनाए.  इसमें दो शतक भी शामिल हैं. क्लब ने कहा, ‘‘इस समय यॉर्कशर काउंटी क्रिकेट क्लब में हर किसी की संवेदनाएं डिकी के परिवार और दोस्तों के साथ हैं. क्लब में सभी लोग उन्हें बहुत याद करेंगे क्योंकि उन्होंने यहां सभी के समर्थन में अविश्वसनीय रूप से बहुत समय बिताया. उन्हें यॉर्कशर के इतिहास के सबसे महान इंसान में से एक के रूप में याद किया जाएगा.

डिकी बर्ड को सम्मान 

बर्ड को 1986 में क्रिकेट में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए एमबीई और 2012 में ओबीई से सम्मानित किया गया था.  उन्होंने हमवतन दिवंगत डेविड शेफर्ड (2009 में निधन) के साथ मैदान पर अंपायरिंग की खास जोड़ी बनाई. बर्ड अपने फैसलों की सटीकता और अपनी खास आदतों के कारण दर्शकों और खिलाड़ियों दोनों के बीच काफी लोकप्रिय थे. वह अकसर मैच स्थल पर सुबह छह बजे ही पहुंच जाते थे.

पिच पर काटे गावस्कर के बाल 

भारत और इंग्लैंड के बीच 1974 में ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गये टेस्ट मैच के दौरान भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने बर्ड से अपने बाल कटवाए क्योंकि उनके बाल बार-बार उनकी आंखों में आ रहे थे. बर्ड ने इसके लिए गेंद की सीम के धागे को काटने वाली कैंची का इस्तेमाल किया था. बर्ड ने बाद में कहा,‘‘यह वही है जो सभी अंपायरों को अपने पास रखना चाहिए.

सबसे सम्मानित अंपायर 

बर्ड को उस समय के खिलाड़ियों से भी काफी सम्मान मिलता था. उन्होंने एक बार कहा था, ‘‘ (गैरी) सोबर्स, (रिची) रिचर्ड्स, (डेनिस) लिली और (इयान) बॉथम जैसे महान खिलाड़ियों ने मुझे अच्छा अंपायर बताया था. यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है. बर्ड अविवाहित रहे लेकिन उन्होंने कुछ बेहतरीन दोस्त बनाए, जिनमें दिवंगत महारानी एलिजाबेथ भी शामिल थी. वह महारानी एलिजाबेथ के यहां अक्सर चाय पार्टियों में जाते थे. लेखक स्टीफन किंग और जॉन मेजर जैसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री उनके अच्छे दोस्त रहे. बर्ड ने दो बेस्ट-सेलर किताबें ‘माई ऑटोबायोग्राफी विद कीथ लॉज’ और ‘द व्हाइट कैप एंड बेल्स’ नामक किताबें भी लिखी

डिकी बर्ड ने खेल में न्याय के साथ साथ इंसानियत को ऊँचा रखा, वो हर गलती के बाद मुस्कुराते, हर फैसले में मानवता दिखाते.उनका सफ़र अंततः यहीं खत्म हुआ, लेकिन उनकी यादें, उनका लहज़ा, उनका अंदाज़ हमेशा जीवित रहेगा.



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