पिपरकुंड में 15 करोड़ की सड़क पहली बारिश में टूटी: रिटेनिंग वॉल खाई में गिरी, पुलिया-रपटों में दरारें; ग्रामीणों ने कलेक्टर और भगवान हनुमान से लगाई न्याय की गुहार – Barwani News

पिपरकुंड में 15 करोड़ की सड़क पहली बारिश में टूटी:  रिटेनिंग वॉल खाई में गिरी, पुलिया-रपटों में दरारें; ग्रामीणों ने कलेक्टर और भगवान हनुमान से लगाई न्याय की गुहार – Barwani News


बड़वानी जिले की पिपरकुंड ग्राम पंचायत में करोड़ों की लागत से बन रही सड़क में घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और ठेकेदार की मिलीभगत से बन रही यह सड़क, पुलिया और रिटेनिंग वॉल पहली ही बारिश में टूटकर

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ग्रामीणों ने कलेक्टर को दिए गए आवेदन में बताया कि ग्राम पंचायत पिपरकुंड में ₹15 करोड़ की लागत से ढेकू फलिया से आमली तक साढ़े छह किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में तीन पुलिया, 18 रपटे और घाट कटिंग का काम भी शामिल है, लेकिन निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही घटिया सामग्री के कारण सड़क किनारे बनी रिटेनिंग वॉल टूटकर खाई में जा गिरी है। वहीं, पुलियों और रपटों में भी बड़ी-बड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं, जो भ्रष्टाचार की पोल खोल रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ रपटें तो हाथ लगाने से ही टूट रहे हैं।

शिकायत दर्ज कराने के बाद ग्रामीणों ने एक अनोखा तरीका अपनाया। वे कलेक्टर कार्यालय परिसर में स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे और वहां भगवान की पूजा-अर्चना की। उन्होंने शिकायती आवेदन और भ्रष्टाचार के आरोपों वाला एक बैनर हनुमान जी के सामने रखकर जल्द न्याय मिलने की प्रार्थना की।

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सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने पर मिलती है धमकी

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे भी बढ़कर उनका आरोप है कि अधिकारी उनकी सहमति के बिना ही शिकायतें बंद कर देते हैं। जब वे दोबारा शिकायत करते हैं तो इंजीनियर उन्हें सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में FIR दर्ज कराने की धमकी देते हैं।

ग्रामीण सेम सिंह रावत ने कहा, “अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकार का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही निर्माण कार्य में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे और उच्च स्तर पर शिकायत करेंगे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार 15 करोड़ रुपए दे रही है तो सड़क मजबूत और टिकाऊ क्यों नहीं बन रही है?

ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी और ठेकेदार तो काम पूरा करके चले जाएंगे, लेकिन इस सड़क का खामियाजा सालों तक यहां के लोगों को भुगतना पड़ेगा।



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