Navratri 2025: एमपी के इस मंदिर में माता तीन रूपों में भक्तों को देती हैं दर्शन

Navratri 2025: एमपी के इस मंदिर में माता तीन रूपों में भक्तों को देती हैं दर्शन


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Navratri 2025 : खंडवा का तुलजा भवानी मंदिर नवरात्रि के पावन अवसर पर शक्ति की साधना और आस्था का जीवंत प्रतीक है. माता के तीनों रूपों के दिव्य दर्शन न केवल भक्तों को अद्भुत अनुभव कराते हैं, बल्कि उन्हें जीवन में ऊर्जा, धैर्य और स्थिरता का मार्ग भी दिखाते हैं.

खंडवा. जिले में स्थित प्राचीन तुलजा भवानी माता मंदिर नवरात्रि के दिनों में भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है. यहाँ की मान्यता है कि माता दिन में तीन अलग-अलग रूप धारण करती हैं. सुबह के समय माता बालिका स्वरूप में, दोपहर में युवा अवस्था में और शाम के समय वृद्धा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देती हैं. यही कारण है कि नवरात्रि में यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचते हैं और इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनते हैं.

इस मंदिर का इतिहास भी बेहद प्राचीन है. मान्यता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि भगवान श्रीराम जब वनवास पर थे, तब वे इस क्षेत्र में आए और माता तुलजा भवानी की आराधना की थी. इसी स्थान पर माता ने भगवान राम को दिव्य अस्त्र-शस्त्र का वरदान प्रदान किया था. यह भी उल्लेख मिलता है कि मराठा वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की आराध्य देवी भी तुलजा भवानी थीं और उन्हें युद्ध के लिए मां भवानी से दिव्य तलवार प्राप्त हुई थी.

सिंह पर सवार अष्टभुजी स्वरूप में स्थापित
मंदिर के गर्भगृह में माता की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है. देवी सिंह पर सवार अष्टभुजी स्वरूप में स्थापित हैं और महिषासुर का वध करते हुए नजर आती हैं. प्रतिमा के नीचे चौंसठ योगिनियों का स्वरूप भी अंकित बताया जाता है. भक्तों का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना माता अवश्य पूरी करती हैं. नवरात्रि के दिनों में मंदिर का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो जाता है. सुबह से ही दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं. विशेष पूजन, हवन और आरती के आयोजन होते हैं.

मंदिर लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना
माता के तीनों रूपों के दर्शन का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए अद्वितीय होता है. बाल स्वरूप में माता का दर्शन कर भक्त बच्चों जैसी मासूमियत और पवित्रता का आशीर्वाद मानते हैं. दोपहर में युवा स्वरूप ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, वहीं शाम को वृद्धा स्वरूप से भक्तों को धैर्य और स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है. कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना है. समय-समय पर यहाँ मराठा शासकों और स्थानीय राजाओं ने पूजा-अर्चना की और मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया. आज भी यह स्थान निमाड़ अंचल की आस्था का प्रमुख केंद्र है. नवरात्रि पर यहाँ विशेष मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज़ के गाँवों से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं.

तुलजा भवानी माता को शक्तिपीठों में से एक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलजा भवानी माता को शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. भक्तों का विश्वास है कि माता का यह स्थान सिद्धपीठ है, जहाँ साधना और भक्ति करने से हर मनोकामना पूरी होती है. मंदिर परिसर के चारों ओर हरियाली और शांत वातावरण है, जो यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है. नवरात्रि के दौरान मंदिर का श्रृंगार विशेष रूप से किया जाता है. लाल चुनरी, फूल-मालाओं और रोशनी से सजा यह मंदिर दिव्य आभा से जगमगाता है. दिनभर भजन, कीर्तन और देवी के जयकारों से वातावरण गूंजता रहता है. भक्त मानते हैं कि नवरात्रि में यहाँ दर्शन करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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