जबलपुर में इको-फ्रेंडली दुर्गा पूजा पंडाल: हांगकांग में लाइव प्रसारण, दुर्गा पूजा में इको-फ्रेंडली पहल; कठपुतली के माध्यम से रामायण की प्रस्तुति – Jabalpur News

जबलपुर में इको-फ्रेंडली दुर्गा पूजा पंडाल:  हांगकांग में लाइव प्रसारण, दुर्गा पूजा में इको-फ्रेंडली पहल; कठपुतली के माध्यम से रामायण की प्रस्तुति – Jabalpur News


जबलपुर में सिटी बंगाली लाइब्रेरी एसोसिएशन ने ‘स्वदेशी पंडाल’ बनाया है, जो पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है और इसमें केवल स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग किया गया है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण का संदेश और पारंपरिक भारतीय कारीगरी को बढ़ावा दे रही है।

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एसोसिएशन के सचिव प्रकाश शाह ने बताया कि इस बार हांगकांग शहर को इसका ग्लोबल पार्टनर बनाया गया है। यहां होने वाले सभी सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण हांगकांग में भी किया जा रहा है। हांगकांग में रहने वाले भारतीय समुदाय ने इस प्रयास की सराहना की है और अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं। वहां की धार्मिक संस्थाओं ने भी लिखित रूप से इस पूजा में अपनी भागीदारी की स्वीकृति दी है।

कठपुतली बताएंगी रामायण की कहानी

इस पूजा उत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष आयोजन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य विलुप्त हो रही लोक कलाओं को फिर से जीवित करना है। इन्हीं में से एक खास आकर्षण है कठपुतली नाच, जो 26 सितंबर को रात 8 बजे आयोजित होगा। इसमें रामायण की कहानियों को कठपुतली के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। यह कार्यक्रम दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव होगा, जो उन्हें अपनी जड़ों से फिर से जोड़ेगा।

छऊ नृत्य के कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है।

विसर्जन पर छऊ नृत्य की प्रस्तुति होगी

विसर्जन के दौरान विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य के कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है। छऊ नृत्य अपनी ऊर्जावान और नाटकीय शैली के लिए जाना जाता है। साथ ही बुंदेली लोक नृत्य और लोक संगीत का भी आयोजन किया गया है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेगा।

100 साल से पूजा का आयोजन कर रही संस्था

सिटी बंगाली लाइब्रेरी एसोसिएशन जबलपुर के प्रवासी बंगाली समुदाय की प्रमुख संस्था है, जो 100 साल से अधिक समय से यहां दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही है। इस वर्ष का स्वदेशी और इको-फ्रेंडली पंडाल उनकी परंपरा और आधुनिकता का एक बेहतरीन मेल है, जो न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना को भी बढ़ावा देता है।



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