बालाघाट के काली पुतली चौक के पास भारत माता की बड़ी प्रतिमा स्थापित करने के नगर पालिका के फैसले पर विवाद शुरू हो गया है। आदिवासी संगठन इस बात से चिंतित हैं कि इस नई प्रतिमा के कारण उनकी पारंपरिक पहचान, यानी काली पुतली चौक की पहचान खत्म हो जाएगी। इसी व
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आदिवासी पहचान खत्म होने का डर
आदिवासी महिला नेत्री हीरासन उईके ने कहा कि वे भी देशभक्त हैं, लेकिन उन्हें डर है कि भविष्य में काली पुतली चौक को हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारा विरोध भारत माता की प्रतिमा लगाने से नहीं है। हम चिंतित हैं कि कहीं हमारी आदिवासी बाला की पहचान को खत्म न कर दिया जाए। हमें इस बात की गारंटी चाहिए कि इसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।”
नगर पालिका अध्यक्ष ने दिया आश्वासन
इस बीच नगर पालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर ने आदिवासी संगठनों को भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि भारत माता की प्रतिमा स्थापित करने से काली पुतली चौक की पहचान खत्म नहीं होगी, बल्कि यह हमारी पहचान का हिस्सा है।
इससे पहले भी तत्कालीन निर्दलीय नगर पालिका अध्यक्ष अनुभा मुंजारे के कार्यकाल में काली पुतली चौक का नाम बदलकर शहीद भगत सिंह चौक रखने का प्रयास किया गया था, तब भी आदिवासी संगठनों के विरोध के बाद भगत सिंह की प्रतिमा को जिला अस्पताल में स्थापित करना पड़ा था। कल गुरुवार को भारत माता की प्रतिमा की स्थापना से पहले नगर में शोभायात्रा निकाली जाएगी।
